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कश्मीर में सघन तलाशी की जरूरत

कश्मीर में सघन तलाशी की जरूरत

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

बाबा विश्वनाथ की नगरी बनारस में जिस दिन दिव्य, भव्य और नव्य काशी का जश्न मनाया जा रहा था, उसी दिन जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आतंकवादियों ने पुलिस दल पर हमला कर दिया। तीन जवानों की मौके पर ही मौत हो गयी थी जबकि दर्जन भर से ऊपर घायल हो गये। खास बात यह कि यह वही दिन था जब आतंकियों ने हमारे देश की संसद पर हमला किया था। जाहिर है कि आतंकवादी दहशत पैदा करना चाहते हैं और बताना चाहते हैं कि अभी हम हैं। उनके गुरूर को तोड़ना जरूरी है। कश्मीर अब केन्द्र शासित प्रदेश है और उसकी डोर पूरी तरह केन्द्र सरकार के हाथ में है। सेना को ‘पूरी’ और ‘खुली’ छूट देने की बात सरकार ने और कश्मीर का शासन संभाल रहे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी कही है। सुरक्षा बलों को आतंकवादियों की तलाशी का अभियान और सघन करना होगा। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को कम से कम ऐसे अवसरों पर ओछी राजनीति नहीं करनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पर शासन संभालने में विफलता के लिए व्यंग्य कसा है।

श्रीनगर के बाहरी इलाके जेवान में एक पुलिस शिविर के पास पुलिस बस पर हुए आतंकवादी हमले में जम्मू-कश्मीर के तीन सशस्त्र पुलिस कर्मियों की मौत हो गई और 11 घायल हो गए हैं। इस हमले में 13 दिसम्बर की रात 2 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, जबकि एक ने अगले दिन सुबह दम तोड़ दिया। हमले में जान गंवाने वालों में एक सहायक उप निरीक्षक और दूसरा सेक्शन ग्रेड कांस्टेबल भी शामिल है। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही थी। यह घटना जेवान इलाके की है। जहां विभिन्न सुरक्षा बलों के कई शिविर हैं। इसी अत्यधिक सुरक्षित इलाके में आतंकवादियों ने बस पर भारी गोलीबारी की। इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी और हमलावरों की तलाश के लिए अभियान शुरू कर दिया। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ट्वीट कर कहा, श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर पुलिस बस पर हुए कायराना हमले की कड़ी निंदा करता हूं। शहीद हुए वीर पुलिसकर्मियों को मेरी श्रद्धांजलि। हम दोषियों को सजा दिलाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। शोकाकुल परिवारों को मेरी संवेदनाएं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने भी शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की लेकिन ऐसे मौके पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आए। अब्दुल्ला ने हमले की “स्पष्ट रूप से निंदा” की है जबकि मुफ्ती ने कश्मीर में “सामान्य स्थिति की झूठी कहानी” के लिए केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट में कहा, कश्मीर में सामान्य स्थिति के बारे में भारत सरकार की झूठी कहानी उजागर हो गई है, फिर भी कोई सुधार नहीं हुआ है।

इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी। पुलवामा में सुराा बलों ने एक आतंकी को मार भी गिराया। इससे पूर्व जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में तीन अज्ञात आतंकवादियों को मार गिराया था। शोपियां के चक-ए-चोलां गांव में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी जिसके बाद सुरक्षाबलों ने तलाशी और घेराबंदी अभियान चलाया। अधिकारी ने कहा कि आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोली चलाई जिसके बाद जवाबी फायर किया गया। अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से दिनभर चली गोलीबारी में तीन आतंकी मारे गए। पुलिस ने मारे गए आतंकवादियों की पहचान आमिर हुसैन, रईस अहमद और हसीब युसूफ के रूप में की थी। पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, तीनों आतंकवादी, आतंकी वारदात को अंजाम देने वाले समूहों से जुड़े थे जिन्होंने सुरक्षाबलों और आम नागरिकों पर कई हमले किये थे। प्रवक्ता ने कहा कि मारे गए आतंकवादियों के पास से हथियार और गोलाबारूद बरामद किये गए जिसमें एक पिस्तौल और एक एके-47 राइफल शामिल थी।

पुलिस ने 5 अक्तूबर को भी कश्मीरी पंडित दवा कारोबारी माखन लाल बिंदरू समेत तीन लोगों की हत्या में से दो का बदला ले लिया था। गोलगप्पे वाले और बांदीपोरा में सूमो टैक्सी स्टैंड अध्यक्ष की हत्या में शामिल आतंकी को मार गिराया था। पुलिस ने कहा है कि घाटी में लक्षित हत्या के चार में से दो मामले को सुलझा लिया गया है। अनंतनाग में एक दहशतगर्द मारा गया था। बांदीपोरा में मुठभेड़ में सूमो बस स्टैंड अध्यक्ष मोहम्मद शफी लोन की पांच अक्तूबर को हुई हत्या में शामिल टीआरएफ आतंकी इम्तियाज अहमद डार को मार गिराया गया था। सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में टीआरएफ को तगड़ा झटका लगा है। मारे गए सात आतंकियों में से उस संगठन से जुड़े चार आतंकी थे।सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर में 24 घंटे में ही चार मुठभेड़ों के दौरान सात आतंकियों को मार गिराया। दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले में दो मुठभेड़ में द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के तीन समेत पांच दहशतगर्दों का सफाया कर दिया। मारा गया टीआरएफ का एक आतंकी श्रीनगर में गैर कश्मीरी गोलगप्पे वाले की हत्या में शामिल था। इन आतंकियों से हथियार भी बरामद किए गए थे। वहीं बांदीपोरा और अनंतनाग में भी अलग-अलग मुठभेड़ में लश्कर समेत दो आतंकियों को ढेर कर दिया था।

पुलिस ने बताया था कि तुलरान गांव में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षाबलों ने सोमवार देर शाम घेराबंदी कर अभियान चलाया। पूरी रात इलाके की घेराबंदी रही। इस दौरान आतंकियों को आत्मसमर्पण का मौका दिया गया, लेकिन वे नहीं माने। सुबह दोबारा ऑपरेशन शुरू किया गया और घर में छिपे टीआरएफ के तीन आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली।जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों का ‘ऑपरेशन इंसाफ’ पूरा होने से सिर्फ एक कदम दूर है। इस साल घाटी में आम लोगों की हत्या करने और हमला करने वाले सभी आतंकियों का सुरक्षाबलों ने सफाया कर दिया है। सिर्फ एक आतंकी बासित डार बचा है और इसे लेकर सुरक्षा बल का सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। सरगना बासित अहमद डार दक्षिण कश्मीर के कुलगाम का निवासी है। बासित अप्रैल में कुलगाम जिले के रेडवानी में अपने घर से गायब हो गया था। वो पहले भी जांच के दायरे में था क्योंकि उसने द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के स्वयंभू प्रमुख अब्बास शेख के साथ काम किया था। टीआरएफ को प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन माना जाता है। डार उस आतंकी दस्ते का हिस्सा रहा है, जिसने शहर में नागरिकों पर हमले को अंजाम दिया था। डार ने साथी आतंकी शाहिद के साथ मिलकर माखन लाल बिंदरू की हत्या की थी। लेकिन बाद में सुरक्षाबलों ने शाहिद को मार गिराया था। सुरक्षाबलों ने महज एक महीने में घाटी में आम लोगों की हत्या की घटनाओं को अंजाम देने वाले सभी आतंकियों को मार गिराया है। अक्टूबर से लेकर नवंबर तक सभी 10 बड़े आतंकियों का खात्मा हो चुका है। दरअसल, कश्मीरी लोगों से आतंकियों से जुड़ी जानकारी लगातार मिल रही है। यही कारण है कि आतंकी लगातार आम कश्मीरियों को टारगेट कर रहे हैं। आम लोगों की हत्या करने में संलिप्त रहे लगभग सभी आतंकवादियों को मार गिराने के बाद अब सशस्त्र बल खुफिया-आधारित ‘सर्जिकल ऑपरेशन’ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसमें केंद्रशासित प्रदेश में आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए छोटी टीम शामिल हैं। जम्मू कश्मीर में पिछले महीने निर्दोष लोगों की हत्याओं का एक सिलसिला शुरू हो गया, जिससे इस क्षेत्र में हिंसा और अशांति की आशंका पैदा हो गई। आतंकवाद रोधी अभियान का मुख्य उद्देश्य रहा है कि इस दौरान निर्दोष लोगों की जान न जाए और सुरक्षाबलों की सभी शाखाएं इस उद्देश्य को हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। खुफिया जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकी आकाओं ने कश्मीर में सक्रिय अपने लोगों को निर्देश दिया है कि जब भी सुरक्षाबल आतंकवाद रोधी अभियान शुरू करें तो उस दौरान कम से कम 10 आम लोगों की हत्या की जाए। इसलिए कश्मीर में तलाशी अभियान को तेज करना होगा। (हिफी)
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