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ज्ञान , भक्ति और कर्म का द्योतक गीता

ज्ञान , भक्ति और कर्म का द्योतक गीता

जहानाबाद । सच्चिदानंद शिक्षा एवं समाज कल्याण संस्थान द्वारा आयोजित गीता जयंती दिवस पर गीता जयंती संगोष्टी के अवसर पर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपाध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता के प्रत्येक श्लोक में ज्ञान मानव जीवन की इस उत्कृष्टतम आचार संहिता की विशिष्टता और शांति है। विश्व मानव के हित के लिए ज्ञान, भक्ति और कर्म की तथ्यपूर्ण दिखाई देने वाले अनेक विश्वासों को मनोवैज्ञानिक ढंग से एक साथ गूंथकर मानव जाति के कल्याण का मार्ग श्रीमद्भगवद्गीता द्वारा प्रशस्त किया गया है। गीता कर्मवाद को कर्मयोग, ज्ञानवाद एवं भक्तिवाद में परिवर्तित करने के लिए बल देती है । गीता में वेदों एवं उपनिषदों का ज्ञान, भक्ति और कर्म की अनूठी त्रिवेणी को जितनी बार पढ़ने पर ज्ञान के नित नए रहस्य खुलते जाते हैं। 18 अध्यायों के 700 श्लोकों में प्रवाहित अद्भुत ज्ञान गंगा का है। श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत के छठे खंड का ‘भीष्म पर्व’ हिस्सा है। भगवान श्रीकृष्ण और मोहग्रस्त अर्जुन के बीच गीता संवाद मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में होने के कारण मोक्षदा एकादशी व गीता जयंती के रूप में जाना जाता है। 78 भाषाओं में गीता के 250 से ज्यादा अनुवाद तथा टीकाएं व भाष्य हैं। अष्टावक्रगीता, दत्तात्रेय की अवधूत गीता , आदिशंकराचार्य की गीता भाष्य , रामानुज की गीता भाष्य , ज्ञानेश्वरी (संत ज्ञानेश्वर), ईश्वरार्जुन संवाद (परमहंस योगानंद), गीता यथारूप (प्रभुपाद स्वामी), भगवद्गीता का सार (स्वामी क्रियानन्द), गीता साधक संजीवनी (रामसुख दास जी), गीता चिंतन (हनुमान प्रसाद पोद्दार), गूढ़ार्थ दीपिका टीका (मधुसूदन सरस्वती), सुबोधिनी टीका (श्रीधर स्वामी), महात्मा गांधी की अनासक्ति योग , गीता पर निबंध (अरविन्द घोष), गीता रहस्य (बाल गंगाधर तिलक), गीता प्रवचन (विनोबा भावे), यथार्थ गीता (स्वामी अड़गड़ानंद जी), जयदयाल गोयन्दका का गीता तत्त्व विवेचनी है । सूर्य गीता , यम गीता , ईश्वर गीता , श्रीमद्भगवद्गीता प्राचीन है । अद्वैत वेदांत के इस ग्रंथ में ऋषि अष्टावक्र और राजा जनक के संवाद का संकलन है। ग्रंथ में राजा जनक के ज्ञान, वैराग्य, मुक्ति और बुद्धत्व प्राप्त योगी की दशा का वर्णन है। रामकृष्ण परमहंस ने नरेंद्र को गीता पढ़ने के लिए प्रेरणा दी थी । श्रीमद्भागवत गीता मानवीय जीवन में ज्ञान समृद्धि ,कर्म , भक्ति , योग , भुक्ति और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है । गीता जयति पर दंस्थान के कार्यक्रम पदाधिकारी पप्पू कुमार , पी. एन .बी . के पदाधिकारी सत्येन्द्र कुमार मिश्र , शब्दक्षर के सचिव मधुकर मिश्र , उर्वशी , प्रियंका आदि ने विचार व्यक्त किए ।
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