धन सम्पदा प्रचूर हो
दुःख दारिद्रय दूर हो,
धन सम्पदा प्रचूर हो।
ऋद्धि सिद्धि का हो आगमन
खुशियाॅं भरपूर हो।।
नित नवल कुसुम खिले,
ना पड़े दुःख की परछाईयाॅं।
जीवन का हर सुख मिले,
यश वैभव में वृद्धि हो।।
रवायतें निभाएं हम,
दीपों के इस त्योहार में।
नवाशा के ज्योति जलाएं हम,
जीवन आपका रौशन हो।।
वजूद अपना मिटा करके,
मद्धिम मद्धिम दीप जले।
झिलमिल झिलमिल जगमग,
धरा का स्वरूप हो।।
दीया बाती मिल जले,
घर देहरी रौशन करे।
आए राम अपने आंगन,
हृदय रामरूप हो।।
सद्वृति का परचम उठे,
पशुवृति मुॅंह बल गिरे।
सबके तारणहार राम,
यही मूलमंत्र हो ।।
धर्म चाहे अनेक हो,
संदेश सबका नेक हो।
राम रहीम जीसस में,
ना कोई विभेद हो ।।
अमीर हो फकीर हो,
ईश्वर की संतान सब।
सबके मन में प्रेम हो,
असत्य नाश समूल हो।।
सुषमा सिंह
औरंगाबाद
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