योगी-धामी ने कई मुद्दे सुलझाए
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
आज से 21 साल पहले उत्तर प्रदेश के हिस्से से बना उत्तराखण्ड राज्य दो दशकों से सम्पत्ति के विवादों मंे उलझा हुआ था। यह विवाद इसलिए भी नहीं सुलझ रहा था क्योंकि यूपी और उत्तराखण्ड मंे अलग-अलग दलों की सरकारें इसे सुलझाने को तैयार भी नहीं थीं। हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान इस मामले को जोर-शोर से उठाया जाता था। संयोग यह कि इस बार भी विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और दोनों राज्यों के बीच सम्पत्ति के बंटवारे का मामला भी उठा है। इस बार दोनों राज्यों मंे एक ही दल (भाजपा) की सरकारें हैं। उत्तर प्रदेश मंे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ 18 नवम्बर को बैठक करके लगभग सभी मामले सुलझा लिये हैं। दोनों राज्यों के बीच 5700 हेक्टेयर भूमि का मामला संयुक्त सर्वेक्षण के बाद सुलझाया जाएगा। अभी तो धामी को कई सौगातें मिली हैं। बनबसा-किच्छा बैराज का निर्माण उत्तर प्रदेश करवाएगा। परिवहन विभाग की 205 करोड़ की रकम भी उत्तराखण्ड को मिलेगी। वन विभाग के मामले भी सुलझा लिये गये हैं। इसके बावजूद उत्तराखण्ड के कांग्रेसी नेता इस समझौते की आलोचना कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जमरानी बांध का मामला उठाया और कहा कि इस पर कोई बात ही नहीं हुई। वे इसे चुनावी दिखावा बता रहे हैं लेकिन दो दशक बाद ही सही, उत्तराखण्ड को उसका हक मिला है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सालों से परिसंपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद की स्थिति रही है और यह मुद्दा 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बोतल से निकल रहा है। जानकार मान रहे हैं चूंकि दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकारें और केंद्र में भी इसलिए इस मुद्दे को सुलझाने के लिए ये संयोग मुफीद हैं और इसके चलते इस मुद्दे के कई पहलुओं को सुलझाया जा सकता है। इसी के चलते 18 नवम्बर को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के साथ उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी की बैठक से उत्तराखंड उम्मीद कर रहा था कि परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर राज्य को कुछ महत्वपूर्ण हासिल होगा। उत्तराखण्ड की उम्मीद सही साबित हुई।
तय कार्यक्रम के अनुसार धामी और योगी की बैठक लखनऊ में हुई जिसमें खास तौर से इसी मुद्दे पर बातचीत की गयी। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में परिसंपत्तियों को लेकर जो विवाद हैं यानी कुंभ की जमीन और नहरों के मसले पर कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है लेकिन उत्तराखंड के लिए अच्छी खबर धामी जरूर ले गये। वास्तव में, दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी जनता को यह बताना चाह रही है कि दो राज्यों ने मिलकर सालों के विवाद को सुलझाने में क्या कामयाबी हासिल की। दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्तियों को लेकर कई मसले हैं, जिनमें परिवहन, सिंचाई, राजस्व जैसे कम से कम 11 विभाग सीधे तौर पर मुब्तिला हैं। टिहरी बांध का मसला है, जहां उत्तर प्रदेश की 25 फीसदी हिस्सेदारी अब भी है, अजमेरी गेट के गेस्ट हाउस का मामला हो या फिर कानपुर में रोडवेज की वर्कशॉप का मुद्दा हो, इन पर बात हो पाना मुश्किल थी क्योंकि ये मामले फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं। योगी और धामी की मीटिंग में मुख्य रूप से जिन मुद्दों पर बात हुई है, उनमें ऊधमसिंह नगर की 4 नहरों, हरिद्वार की 1 नहर और इन दोनों जिलों में जमीन संबंधी मामले शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच 21 सालों से चले आ रहे परिसंपत्तियों के बंटवारे के विवादों के आखिरकार सुलझने का दावा किया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ लंबी बैठक और बातचीत के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह दावा किया। धामी ने कहा कि तकरीबन सभी मामलों में आपसी सहमति के साथ निर्णय ले लिया गया है और जो मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, उन्हें आपसी सामंजस्य से सुलझाने के लिए दोनों राज्य कोर्ट में आवेदन कर कोर्ट से वापस लेंगे। धामी ने ये योगी का आभार जताते हुए यह भी कहा कि ये विवाद छोटे और बड़े भाई के बीच होने वाली मामूली बातों की तरह थे। योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक के बाद धामी ने कहा कि लगभग सारे मामलों पर सहमति बन गई है। वन विभाग के मामले भी सुलझा लिये गए हैं।
उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के बीच विवादित 5700 हेक्टेयर भूमि का जॉइंट सर्वे होगा, इसमें से आवश्यकता अनुसार भूमि यूपी के हिस्से में जाएगी और बाकी उत्तराखंड के। आवास विकास के मुद्दों पर दोनों राज्यों के बीच 50-50 फीसदी के आधार पर देनदारियों और परिसंपत्तियों का बंटवारा हो जाएगा। परिवहन विभाग की 205 करोड़ रुपये की रकम उत्तराखंड को मिलेगी। बनबसा किच्छा बैराज का निर्माण यूपी कराएगा। हरिद्वार का होटल अलकनंदा उत्तराखंड को मिलेगा। किच्छा में बस स्टॉप की जमीन उत्तराखंड को मिलेगी। वॉटर स्पोर्ट्स शुरू करने की अनुमति उत्तराखण्ड को मिली है।
बैठक के बाद धामी ने यह भी बताया कि कुछ मामलों को निपटाने के लिए यूपी ने 15 दिनों का समय मांगा है। इस दौरान जिन मामलों में संयुक्त सर्वे किया जाना है, वो भी होगा। दोनों राज्यों द्वारा कोर्ट से मामले वापस लिये जाएंगे और जो मसले बच गए हैं, 15 दिन बाद वो भी खत्म हो जाएंगे। गौरतलब है कि इससे पहले भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच इन विवादों को लेकर बातचीत होती रही है, लेकिन पहले सहमति नहीं बन पाई थी। अब दोनों राज्यों के लिए यह बड़ी उपलब्धि है।
चुनाव से पहले उत्तराखंड बीजेपी इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बता रही है और दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों का आभार जता रही है। बीजेपी विधायक और सीनियर नेता खजानदास का कहना है कि सीएम योगी और सीएम धामी की बैठक सफल रही और जो काम अपने दो कार्यकाल में कांग्रेस की सरकार नहीं कर पाई, वो काम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी सरकार ने कर दिया। वहीं, कांग्रेस की तरफ से पूर्व सीएम हरीश रावत का कहना है कि पौने 5 साल में जब कुछ नहीं हुआ, तब चुनाव से पहले ये बैठक कर दी गई ताकि चुनाव में अगर जनता सवाल पूछे तो बीजेपी कह सके कि बैठक तो की। रावत ने कहा कि जमरानी बांध एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन उसको लेकर कोई बात नहीं हुई। वहीं, जमीन के मामले में 5 साल बाद भी बात सिर्फ सर्वे तक पहुंच पाई। रावत ने कहा कि जनता सब कुछ समझती है। विपक्ष के नेता के नाते उनको कुछ तो कहना ही था लेकिन उत्तराखण्ड की जनता को उसका बड़ा हिस्सा यूपी से मिल गया है।
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