बुंदेलखंड में विकास की बयार
(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
बुंदेलखंड ऐतिहासिक विरासत, वीरता, शौर्य और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध रहा है किंतु विगत कई दशकों से यहां के विकास पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। पानी का संकट, कृषि की बदहाली, पलायन, भूखे पशु आदि को लेकर यह क्षेत्र चर्चित होने लगा। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद यहां के विकास पर विशेष ध्यान दिया। बुंदेलखंड का कुछ हिस्सा मध्य प्रदेश में है। यहां शिवराज सिंह सरकार ने अनेक उल्लेखनीय कार्य किये जिससे अनेक समस्याओं का समाधान हुआ। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद केंद्र की योजनाओं को बुंदेलखंड में प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया। इससे यहां विकास का नया अध्याय शुरू हुआ। इसके पहले बुंदेलखंड के सभी घरों में नल से जल की कल्पना करना भी मुश्किल था। वर्तमान सरकार के प्रयासों से यह सपना साकार हो रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और डिफेंस कॉरिडोर से यहां के विकास को नया आयाम मिल रहा है। इन सभी सन्दर्भो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झांसी यात्रा महत्वपूर्ण साबित हुई। उन्होंने तीन दिन से चल रहे राष्ट्रीय रक्षा समर्पण पर्व का समापन किया। इस अवसर पर स्वदेश निर्मित लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर एलसीएच वायु सेना को सौंपा। थल सेना को ड्रोन यूएवी और नौसेना के युद्धपोतों के लिए विकसित किये गए उन्नत ईडब्ल्यू सूट भी सौंपें गए। रक्षा मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार ने संयुक्त रूप से झांसी में तीन दिवसीय राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व समारोह का आयोजन किया था। यह आजादी के अमृत महोत्सव का हिस्सा है। इस अवसर पर अनेक योजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित की गई। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड एचएएल द्वारा डिजाइन और विकसित लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर एलसीएच दो इंजन वाला हेलीकॉप्टर पांच से आठ टन वर्ग का लड़ाकू हेलीकॉप्टर है। एलसीएच में प्रभावी लड़ाकू भूमिकाओं के लिए उन्नत तकनीकों और सुविधाओं को शामिल किया गया है। इसे दुश्मन की वायु रक्षा, काउंटर विद्रोह, खोज और बचाव, टैंक विरोधी, काउंटर सर्फेस फोर्स ऑपरेशंस इत्यादि जैसी भूमिकाओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। एलसीएच दुनिया का एकमात्र अटैक हेलीकॉप्टर है जो हथियारों और ईंधन के काफी भार के साथ पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर लैंडिंग और टेक ऑफ कर सकता है। ड्रोन यूएवी को भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। भारतीय सेना ने विस्तृत परीक्षण और परीक्षण के बाद इन ड्रोनों को भारतीय उद्योग स्टार्टअप से खरीदने का फैसला किया है। भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा भारतीय यूएवी की तैनाती भी भारतीय ड्रोन उद्योग की बढ़ती परिपक्वता का प्रमाण है। भारतीय विमान वाहक विक्रांत सहित नौसैनिक जहाजों के लिए डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किए गए और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड बीईएल निर्मित उन्नत ईडब्ल्यू सूट से भी सेना की शक्ति बढ़ेगी। उन्नत ईडब्ल्यू सूट का उपयोग विभिन्न नौसैनिक जहाजों में किया जाएगा। जिसमें विध्वंसक, युद्धपोत आदि शामिल हैं। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान आगे बढ़ा है।
रक्षा मंत्रालय ने इस अभियान के अंतर्गत अनेक कदम उठाए हैं। स्वदेशीकरण सूची जारी की गई। घरेलू उद्योग के लिए पूंजी खरीद बजट का चैसठ प्रतिशत निर्धारित किया गया। इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस आई डेक्स पहल के तहत स्टार्टअप्स की सुविधा प्रदान की गई। पूंजी अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज किया गया। इसके साथ ही रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर का निर्मांण चल रहा है। सेना के तीनों अंग स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित प्लेटफार्मों को अपना रहे हैं। झांसी में प्रधानमंत्री द्वारा सौंपे गए तीन प्लेटफॉर्म रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन डीआरडीओ, डीपीएसयू,रक्षा उद्योग और स्टार्टअप के योगदान के साथ भारतीय रक्षा उद्योग की प्रगति के प्रमाण है। उत्तर प्रदेश भी आत्मनिर्भर भारत अभियान में उल्लेखनीय भूमिका का निर्वाह कर रहा है। योगी आदित्यनाथ स्वयं इसके प्रति गंभीरता से प्रयास कर रहे है। यहां युद्धपोत और मिसाइल से लेकर अन्य उपकरण बनाने का अभियान चल रहा है। उत्तर प्रदेश डिफेंस के मैनुफैक्चरिंग के मामले में बहुत आगे जा रहा है। अलीगढ़ नोड में छोटे हथियार,डिफेंस पैकेजिंग बन सके इसके लिए नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं। यह इस क्षेत्र को नई पहचान देगा। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर बहुत बड़ा अवसर लेकर आ रहा है। तीन वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया था। अब तक उत्तर प्रदेश में तीन लाख करोड़ का निवेश हो चुका है। रक्षा उत्पादन में बहुत प्रगति हुई है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था पहले छठवें स्थान पर थी आज दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरी है। निवेश का बेहतर वातावरण वर्तमान सरकार ने तैयार किया है। पहले उत्तर प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में देश में चैदहवें स्थान पर था,आज सरकार की नीतियों से दूसरे स्थान पर आ गया है। चार वर्ष पहले उत्तर प्रदेश का केन्द्र की किसी योजना में स्थान नहीं होता था। आज केन्द्र सरकार की पैंतालीस योजनाओं में प्रदेश प्रथम स्थान पर है। उद्योग व कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र का तेजी से विकास हो रहा है। बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर का निर्माण बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लिए लाभप्रद है। जल जीवन मिशन के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड तथा विन्ध्य क्षेत्र में हर घर नल योजना प्रारम्भ की गयी है। एक्सप्रेस-वे के किनारों पर औद्योगिक क्लस्टर विकसित की परियोजना प्रगति पर है। कुछ दिन पहले ही रक्षा मंत्री ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर यूपीडीआईसी में पहली संचालित निजी क्षेत्र की रक्षा विनिर्माण सुविधा का उद्घाटन किया था। रक्षा विनिर्माण सुविधा विमान के इंजन हेलीकॉप्टर इंजन विमानों के लिए संरचनात्मक भागों,ड्रोन और यूएवी,पनडुब्बियों, अल्ट्रा लाइट आर्टिलरी गन,स्पेस लॉन्च व्हीकल और स्ट्रैटेजी सिस्टम आदि का निर्माण करेगी। यह एयरोस्पेस अनुप्रयोगों के लिए टाइटेनियम और अन्य विदेशी मिश्र धातुओं में प्रमुख कच्चे माल का उत्पादन करेगी। नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का शुभारंभ किया था। यह अब प्रगति पर है। इसकी धमक दुनिया में दिखाई देने लगी है। भारत अभी तक सामरिक हथियारों का सबसे बड़ा आयातक माना जाता था। अब सत्तर से अधिक देशों को भारत सामरिक उत्पाद का निर्यात कर रहा है। अन्य क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत अनेक योजनाएं संचालित हो रही है। उत्तर प्रदेश के डिफेंस इण्डस्ट्रियल काॅरिडोर से देश को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और मेक इन इण्डिया को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
लखनऊ में उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट का शुभारम्भ करते हुए उत्तर प्रदेश में एक डिफेंस इण्डस्ट्रियल काॅरिडोर स्थापित किये जाने की घोषणा की थी। आज भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा कर रहा था। पहले हम आयात पर ही निर्भर थे। रक्षा मंत्रालय द्वार दो सौ से अधिक उत्पाद की सूची जारी की गई है। इन सभी का उत्पाद अब भारत में होगा। किसी भी सूरत में दुनिया के दूसरे दूर देशों से आयात नहीं किया जाएगा। फाइटर प्लेन, हेलीकॉप्टर,टैंक और पनडुब्बियों सहित के निर्माण के अवसर भी हमने मेगा डिफेंस प्रोग्राम तहत शुरू किए हैं।
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