कृषि कानूनों पर मोदी का दूरदर्शी फैसला
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूरदर्शी और सामयिक फैसले लेने मे कभी झिझक नहीं महसूस करते। दुनिया भर के नेता उनकी इसीलिए तारीफ भी करते हैं। लगभग एक साल से चल रहा किसान आंदोलन भले ही उत्तर भारत तक सीमित था लेकिन इसे दक्षिण भारत तक ले जाने का प्रयास हो रहा था। पांच राज्यो में विधानसभा के चुनाव होने हैं जिनमंे तीन बड़े राज्यों पर किसान आंदोलन का प्रभाव पड़ सकता था। इसके अलावा देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भी विवादित तीनों कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा रखी थी। इसका मतलब सुप्रीम कोर्ट भी केन्द्र सरकार के इस फैसले से सहमत नहीं था। किसानों ने आगामी शीतकालीन सत्र से रोज ट्रैक्टर मार्च की घोषणा कर रखी थी। इन सब बातों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19 नवम्बर 2021 को गुरुनानक जयंती के दिन तीनों विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी। हालांकि श्री मोदी ने सरकार की भावना को सही ठहराने का प्रयास किया। उन्हांेंने कहा कि देश की बदलती जरूरतों को ध्यान मंे रखकर और कृषि की वैज्ञानिक पद्धति को बढ़ावा देते हुए, एमएसपी को और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने के लिए इन कानूनों को सरकार लायी थी। उन्हांेने कहा कि इन सभी विषयों पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमंे केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, किसान, कृषि वैज्ञानिक और कृषि अर्थशास्त्री शामिल होंगे। इस प्रकार सरकार ने अपनी मंशा को नेक और किसानों के हित में साबित करने का प्रयास भी किया है। किसान नेताओं ने इसीलिए प्रधानमंत्री की इस घोषणा का स्वागत किया है जबकि विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया हताशा भरी दिख रही है। मोदी की इस घोषणा से कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों की रणनीति ही फेल हो गयी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुनानक प्रकाश पर्व के मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। पीएम ने कहा कि एमएसपी को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए, ऐसे सभी विषयों पर, भविष्य को ध्यान में रखते हुए, निर्णय लेने के लिए, एक कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे, किसान होंगे, कृषि वैज्ञानिक होंगे, कृषि अर्थशास्त्री होंगे। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को वापस करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे। पीएम ने कहा कि इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से शुद्ध, किसानों के हित की बात, हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए। कृषि अर्थशास्त्रियों ने, वैज्ञानिकों ने, प्रगतिशील किसानों ने भी उन्हें कृषि कानूनों के महत्व को समझाने का भरपूर प्रयास किया। पीएम ने कहा कि हमारी सरकार, किसानों के कल्याण के लिए, खासकर छोटे किसानों के कल्याण के लिए, देश के कृषि जगत के हित में, देश के हित में, गांव गरीब के उज्ज्वल भविष्य के लिए, पूरी सत्य निष्ठा से, किसानों के प्रति समर्पण भाव से, नेक नीयत से ये कानून लेकर आई थी। पीएम ने कहा कि आज ही सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक और अहम फैसला लिया है, जिसमें जीरो बजट खेती यानी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए और देश की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर क्रॉप पैटर्न को वैज्ञानिक तरीके से बदलने की दिशा में काम किया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा, सरकार ने अच्छी क्वालिटी के बीज के साथ ही किसानों को नीम कोटेड यूरिया, सॉयल हेल्थ कार्ड, माइक्रो इरिगेशन जैसी सुविधाओं से भी जोड़ा।
किसानों को उनकी मेहनत के बदले उपज की सही कीमत मिले, इसके लिए भी अनेक कदम उठाए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के कोने-कोने में कोटि-कोटि किसानों ने, अनेक किसान संगठनों ने इसका स्वागत किया और समर्थन किया। मैं आज उन सभी का बहुत आभारी हूं। मैंने अपने 5 दशक के सार्वजनिक जीवन में किसानों की परेशानियों और चुनौतियों को बहुत करीब से देखा और महसूस किया है। जब देश ने मुझे 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में सेवा का अवसर दिया तो हमने कृषि विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। पीएम मोदी ने किसानों से अपील की, आप अपने अपने घर लौटे, खेत में लौटें, परिवार के बीच लौटें, एक नई शुरुआत करते हैं।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा, ‘आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है। सभी किसानों को इसका स्वागत करना चाहिए, अब उन्हें अपने धरने समाप्त कर देने चाहिए।”
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देश भर के किसानों के आंदोलन को 26 नवंबर को एक साल हो जाएगा।आंदोलन का एक साल पूरा होने पर संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि 26 नवंबर से देशभर में किसानों द्वारा प्रदर्शन किया जाएगा और कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग तेज की जाएगी। दिल्ली-हरियाणा सीमा पर कुंडली बॉर्डर पर हुई संयुक्त किसान मोर्चे की बैठक में तय किया गया कि किसान संघर्ष का एक साल मनाने के लिए देशभर में बड़े पैमाने पर किसान 26 नवंबर को प्रदर्शन करेंगे। मोर्चे ने कहा कि इसके लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली कूच करेंगे और आंदोलन को तेज करेंगे। किसानों ने तय किया कि 29 नवंबर से शुरु हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान गर रोज 500 ट्रैक्टर संसद की तरफ शांतिपूर्ण मार्च करेंगे। यह सिलसिला पूरे शीत सत्र के दौरान जारी रहेगा।मोर्चे की बैठक में शामिल किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान चीन में नहीं रहते कि उन्हें दिल्ली जाने के लिए परमीशन लेना पड़ेगी। उन्होंने कहा कि गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर सड़कें खोल दी गई हैं, इसलिए किसी परमीशन के बिना ही किसान संसद की तरफ शांतिपूर्ण मार्च करेंगे। (हिफी)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

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