योगी के कंधे पर मोदी का हाथ
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
भारतीय संस्कृति मंे आशीर्वाद देने के लिए सिर पर हाथ रखने की परम्परा है। घर मंे भी बड़े-बुजुर्गों का सिर पर हाथ रहता है, तब तक कोई चिंता नहीं रहती। हाथ का स्थान कभी बदल जाता है तो उसके अर्थ भी बदल जाते हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूपी की यात्रा पर आये। उत्तर प्रदेश को प्रधानमंत्री कितना महत्व देते हैं, यह इसी से सिद्ध होता है क्योंकि एक महीने के अंदर पीएम की यह तीसरी यात्रा थी। पुलिस प्रमुखों को संबोधित करने की मोदी ने परम्परा डाली है, उसी के तहत यह यात्रा भी थी। इस यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कंधे पर हाथ रखते हुए काफी देर तक विचार-विमर्श किया। कंधे पर हाथ भरोसा देने के लिए रखा जाता है। उत्तर प्रदेश मंे अगले साल के प्रारम्भ मंे ही विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीति में शत्रु पार्टी से बाहर ही नहीं, पार्टी के अंदर भी होते हैं। इसलिए पीएम मोदी का योगी के कंधे पर हाथ रखना राजनीतिक गलियारे मंे चर्चा का विषय बना हुआ है। मोदी का भरोसा तो भाजपा शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को है लेकिन श्री मोदी जिन पर भरोसा कर रहे हैं, उन बिरले नेताओं मंे योगी आदित्यनाथ हैं। योगी ने भी कहा ‘जिद है एक सूर्य उगाना है, अम्बर से ऊंचे जाना है...।’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक नया भारत बनाने के पथ पर आगे बढ़ चुके हैं। पीएम मोदी के साथ कदमताल करते हुए दो तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे जारी किया है। योगी ने लिखा है, हम निकल पड़े हैं प्रण करके, अपना तन-मन अर्पण करके, जिद है एक सूर्य उगाना है, अम्बर से ऊँचा जाना है, एक भारत नया बनाना है। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय राज्य के दौरे पर थे। रविवार (21 नवंबर) को वह लखनऊ में रहे। माना जा रहा है कि इसी दौरान दोनों नेताओं (पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ) के बीच बातचीत हुई और उसी दौरान दोनों नेताओं ने साथ कदमताल करते हुए तस्वीरें खिंचवाई हैं। बाद में मुख्यमंत्री ने उसे सोशल मीडिया पर साझा किया। दो दिन पहले प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के महोबा में सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण किया था। इसके अलावा वो झांसी में राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व में सम्मिलित हुए थे।
उत्तर प्रदेश में राकेश टिकैत की अगुवाई में खासकर जाट किसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। यूपी की करीब 80 विधानसभा सीटों पर जाट वोटरों का वर्चस्व रहा है। पूरे यूपी में वैसे तो जाट मतदाताओं की आबादी करीब ढाई फीसदी ही है लेकिन पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में करीब 14 फीसदी जाट वोटर हैं। सीएसडीएस लोकनीति के मुताबिक 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में जाटों ने बीजेपी को वोट दिया था। इस वजह से पश्चिमी यूपी की 51 सीटों पर बीजेपी की जीत हुई थी। इस इलाके में 2017 में समाजवादी पार्टी ने 16, कांग्रेस ने दो और बसपा ने एक सीट जीती थी। रालोद को भी एक सीट मिली थी लेकिन बाद में उसके विधायक सहेंदर सिंह बीजेपी में शामिल हो गए थे। अब जब जाट मतदाता बीजेपी से बिदके हुए दिख रहे हैं, तब केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने कृषि कानूनों पर यू-टर्न लेने का फैसला किया है। हालांकि, इससे पहले 2015 में बीजेपी सरकार भू-अध्यादेश पर भी यू-टर्न ले चुकी है।
अगले साल फरवरी-मार्च में वैसे तो पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन इनमें सबसे अहम उत्तर प्रदेश है। 2017 में हुए चुनाव में 403 सीटों में से 312 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। उसे कुल 39.67 फीसदी वोट मिले थे। उस वक्त बीजेपी के साथ अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी थी। इन दोनों दलों को क्रमशः 0.98 और 0.70 फीसदी वोट मिले थे। यानी एनडीए को तब कुल 41.35 फीसदी वोट मिले थे। जाट किसान ऐलान कर चुके हैं कि वो बीजेपी को वोट नहीं देंगे। अगर 2022 में यूपी में बीजेपी की हार होती है तो 2024 में लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी की राह मुश्किल हो सकती है क्योंकि यहां से 80 सांसद चुने जाते हैं जो केंद्र में सरकार बनाने में अहम भूमिका अदा करते हैं। इसलिए मोदी ने योगी के कंधे पर हाथ रखा।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में हारी हुई 78 सीटों पर फोकस करके बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी नैया पार लगाने की कोशिश में जुटी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इन इलाकों का दौरा कर रहे हैं और नई परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास कर रहे हैं। इसके साथ ही वह लोगों को यह भी ध्यान दिलाना नहीं भूलते कि अगर पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को वे लोग जिताते तो इस इलाके की तस्वीर बदल जाती। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के चुनावों में बीजेपी ने 403 सदस्यीय विधानसभा में 312 सीटें जीती थीं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल ने नौ और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने चार सीटें जीती थीं। वहीं अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने 47, मायावती की बहुजन समाज पार्टी-19 और कांग्रेस ने 7 सीटें जीती थी। इसके अलावा आरएलडी को एक, निषाद पार्टी को 1 और तीन सीटों पर निर्दलीयों ने जीत हासिल की थी। बीजेपी के एक नेता बताते हैं कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने अब तक ऐसे 19 विधानसभा क्षेत्रों में नई परियोजनाएं शुरू की हैं या परियोजनाओं का उद्घाटन किया और जनसभाओं को संबोधित किया है। मुख्यमंत्री आने वाले दिनों में बाकी की सीटों का भी दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी ने 2022 के चुनावों में उन 78 सीटों में से कम से कम 55 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।
इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री के अलावा दोनों डिप्टी सीएम भी इन निर्वाचन क्षेत्रों में जल्द ही इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करेंगे।’ बीजेपी नेता ने कहा कि अगर भाजपा को दूसरी जीती हुई सीटों पर ‘स्थानीय विधायकों के खिलाफ’ सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ता है तो पार्टी इन निर्वाचन क्षेत्रों में जीत से इसकी भरपाई कर सकती है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों ऐसी ही एक विधानसभा सीट बदायूं जिले के सहसवां पहुंचकर विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस सीट पर 2017 के चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत हासिल की थी और बीजेपी चैथे स्थान पर रही थी। उसी तरह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी आदित्यनाथ के साथ हाल ही में आजमगढ़ में एक राज्य विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी। बीजेपी के एक स्थानीय नेता बताते हैं कि जिस क्षेत्र में शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया था, वह क्षेत्र यादव बहुल आजमगढ़ सदर में पड़ता है। इस सीट से सपा के दुर्गा प्रसाद यादव आठवीं बार विधायक हैं। उस सीट पर बीजेपी कभी जीत नहीं पाई है। आजमगढ़ जिला सपा का गढ़ रहा है, क्योंकि पार्टी ने 2012 में 10 विधानसभा सीटों में से नौ और 2017 के विधानसभा चुनावों में पांच पर जीत हासिल की थी। वहीं मुख्यमंत्री ने इससे पहले 8 नवंबर को शामली का दौरा किया था और 425 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इसके अलावा 2017 के चुनाव में सपा के खाते में गए कैराना विधानसभा क्षेत्र में पीएसी बटालियन की नींव रखी। उसी दिन सीएम ने रामपुर जिले में कई परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। इसके अलावा रामपुर शहर में एक जनसभा को संबोधित किया, जहां से सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान विधायक हैं। योगी भाजपा के लिए नयी उम्मीदें जुटा रहे हैं। (हिफी)
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