समाज सेवा या समाज से मेवा?
एक सच्ची घटना का बयान करने की इच्छा हुई है।यदि इस से किसी व्यक्ति विशेष को ठेस लगे तो क्षमा चाहूँगा, क्योंकि मेरा मकसद किसी को ठेस पहुचाना नहीं अपितु वर्तमान सामाजिक परिवेश मे परिवर्तन लाने का प्रयास मात्र है।
आज से लगभग बीस वर्ष पूर्व अपने समाज के एक अतिदीन परिवार के कन्या की शादी में मदद करने को सोच कर अपने एक अभिन्न मित्र के साथ समाज के तथाकथित सम्भ्रांत एवं सामाजिक विकास के लिए लंबी लंबी डींगे मारने वाले लोगों के दरवाजे दरवाजे दस्तक दी।कुछ लोगों ने ग्यारह इक्कीस रुपये कुछ ने अपने घर से जजमनिका में प्राप्त वस्त्र और कुछ ने थोड़े से अनाज भी दान किए।मेरे द्वारा किए जा रहे इस कार्य की सराहना भी की।हम दोनो मित्रों का उत्साह वर्द्धन भी किया।वहीं कुछ ऐसे सम्भ्रांत सज्जन भी मिले जिन्होंने यह कहते हुए हमारा उत्साह भंग करने का प्रयास किया कि तोहनी के आउ कोई काम न हब पढ़े लिखे के समय में कहाँ ई सब पचड़ा में पड़ल ह।का कहियो बाबू मन तो हमरो हल मदद करे के बकि हमरा हीं बड़ा भारी पूजा के आयोजन हे लाखों रुपया ई पूजा में खर्च होए के उम्मीद हे।ई चलते अभी हम कुछ न देवे के स्थिति में ही,फिर कभी कोई बड़ा आयोजन करेके सोचिह त मिलिह हमरा जे कहब हम जरूर देब।कुछेक सज्जन ऐसे भी मिले जिन्होने यह कहते हुए साबाशी दी कि बहुत अच्छा करित ह ई सब होबे के चही बकि का कहियो अभी हम कुछ भी न करे के स्थिति मे ही,देखैते ह नीचे चरचकवा गाड़ी तैयार हे हमनी सपरिवार बाहर टूर पर जाइत ही समझ सक ह बाहर के यात्रा मे सपरिवार जाये मे ओहू अप्पन गाड़ी से केतना खर्च हो सक हे।अभी माफ कर बाबू फिर कोई बड़ा कार्यक्रम करिह त जरूर अइह हम भरपूर मदद करब।यह कहते हुये पाँच रुपये का एक नोट मेरी ओर बढ़ाना चाहा ल एकरा रख तब तक।वह भी मेरी हाँथ में आने से पूर्व ही जमीन पर गिर गया।
उपरोक्त घटनाक्रम से गुजरते हुए भी हम दोनो मित्रों ने अपने विद्यार्थी जीवन के कुछ अन्य मित्रों का साथ लेकर अपने ट्युशन के कुछ बचे पैसों को मिलाकर शेष समाज से प्राप्त राशि के दम पर उस गरीब विधवा की अंधी बेटी के विवाह मे बारात और सरात के नास्ते की व्यवस्था सशरीर उपस्थित होकर करवा पाया।
आज तक उपरोक्त घटना झकरोरती है तब विशेषकर जब किसी तथाकथित बड़े आयोजन में लाखों रुपये पंडाल और लग्जेरियस खाने तथा अपना चेहरा बड़े बड़े होल्डिंग लगवाकर लोगों को चमकाते देखता हूँ।
......मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
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