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न्यायपालिका निर्भीकता से भारतीय लोकतंत्र का सबसे मजबूत खंभा बने-रमेश कुमार चौबे

न्यायपालिका निर्भीकता से भारतीय लोकतंत्र का सबसे मजबूत खंभा बने-रमेश कुमार चौबे

भारतीय जनक्रांति दल डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय महासचिव रमेश कुमार चौबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि न्यायपालिका निर्भीकता से भारतीय लोकतंत्र का सबसे मजबूत खंभा बने I न्यायपालिका राजनीति शासित शासकीय सत्ताधीशों की इक्छा पूर्ति की बजाय भारतीय लोकतंत्र की जन आकांक्षा की समपूर्ति करे I अकोर्डिंग टू ला जस्टिस करे I न्यायपालिका में स्वविवेक के निर्णय की आड़ में हो रहे न्यायायिक भ्रष्टाचार को समाप्त करे I
रमेश कुमार चौबे ने कहा है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर लोकतंत्र के अन्य स्तंभों कार्यपालिका एवं विधायिका द्वारा कुठाराघात किया जाता रहा है I ऐसे में अगर न्यायपालिका भी कार्यपालिका और विधायिका की तरह जन आकांक्षाओं पर कुठाराघात करती रही तो फिर तो लोकतंत्र को समाप्त कर राजतंत्र व्यवस्था लागु कर देना चाहिए I 
रमेश कुमार चौबे ने कहा है कि एक समय न्यायपालिका ने ही जनमानस में सच्चा न्याय के प्रति भरोसा जगाया था जिसके बाद जनमानस में न्यायपालिका की जय-जय कारी हुई थी लेकिन आज न्यायपालिका के ऐसे कुछ निर्णय से जो जनमानस के प्रति कुठाराघात करते हैं से आम जनमानस के मन में यह सवाल जागृत होता है कि कहीं न्यायपालिका भी कार्यपालिका और विधायिका की तरह जन आकांक्षाओं पर कुठाराघात की ओर तो उन्मुख नहीं हो रही है I भारतीय जनमानस में लोकतंत्र के अन्य स्तंभों की तुलना में भारतीय न्यायपालिका के प्रति आज भी सर्वाधिक श्रद्धा और विश्वास दूसरों से कहीं अधिक है जिसे हर हाल में बरकरार रखने की आवश्यकता है I
भारतीय जनक्रांति दल डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय महासचिव रमेश कुमार चौबे ने कहा है कि सच्चाई यह है कि इस बीच न्यायपालिका पर लोगों का भरोसा दरका है। भ्रष्टाचार ने न्याय के मंदिर को भी अपना निशाना बनाया है। चाहे वो न्यायपालिका में शीर्ष पदों पर नियुक्तियों से संबंधित हो ,चाहे वह प्रोन्नति से जुड़ा हो और चाहे वो न्यायायिक भ्रष्टाचार,परिवारवाद,पेशी वगैरह से जुड़ा हुआ हो I
रमेश कुमार चौबे ने कहा है कि न्यायपालिका में रिकार्डों का मूवमेंट अक्सर बिना नाजायज चढ़ाव चढ़ाये नहीं होता है और न ही कोई बजाप्ता नक़ल बिना नाजायज चढ़ाव चढ़ाये मिलता है I एक कटु सच्चाई यह है कि सिविल कोर्ट के प्रधान जिला जज द्वारा अपने अधिनस्त जजों के पास तदर्थ केस के रिकार्ड का मूवमेंट भी बिना नाजायज चढ़ाव चढ़ाये नहीं होता है I
रमेश कुमार चौबे ने कहा है कि सबसे बड़ा कटु सत्य तो यह है कि जब निचली अदालत के आदेश के खिलाफ जब उच्च न्यायलय में कोई अपील जाता है और यदि वह अपील ख़ारिज हो जाता है तो वैसी स्थितियों में निचली अदालतों द्वारा भेजी गई रिकार्ड फाईल भी उच्च न्यायालयों में पड़ी रहती है घुल खाते रहती है I ऐसे अनेकों सजायाफ्ता हैं जिन्हें निचली अदालतों ने सजा मुक़र्रर कर दिया है और जब उच्च न्यायलय में भी सजायाफ्ता के अपील ख़ारिज हो गए होते हैं फिर भी वो रिकार्ड फाईल उच्च न्यायलय के रिकार्ड रूम में धुल खाते रहता है सड़ते रहता है I जबकि यहाँ पर ही सच्चे न्याय के लिए और सजा को एक्स्क्युट कराने के लिए सजायाफ्ता की रिकार्ड फाईल को संबंधित अदालतों को संवेदनशीलता और सक्रिता से भेजने की जरुरत है I इसके साथ ही साथ सभी सजायफ्ता की उच्च न्यायालयों की ख़ारिज हुई अपील को पुलिस मुख्यालय के साथ साथ संबंधित जिला के पुलिस कप्तान को इसके एक्स्क्युशन के लिए शख्त निर्देशों के साथ भेजने की जरुरत है I
भारतीय जनक्रांति दल डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय महासचिव रमेश कुमार चौबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है राज्य सरकार को क्राईम कंट्रोल करने के लिए और अपराधी को मिले सजा को क्रियान्वित करने के लिए संवेदनशीलता और सक्रियता से वैसे तमाम फाईलों का रिकार्ड उच्च न्यायलय के रिकार्ड रूम से खोजवाना चाहिए जिसमें सजायाफ्ता की अपील ख़ारिज हो गई है फिर भी उसकी रिकार्ड उच्च न्यायलय के रिकार्ड रूम में पड़ी हुई है I
भारतीय जनक्रांति दल डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय महासचिव रमेश कुमार चौबे ने पटना उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश से भी इस आशय का ध्यानाकर्षण पत्र लिखा है जिसमें पटना उच्च न्यायलय के माननीय मुख्य न्यायाधीश से मांग की गई है कि पटना उच्च न्यायलय के रिकार्ड रूम से वैसे सारे रिकार्ड चिन्हित कर भेजने कि जरुरत है जो निचली अदालतों के सजायाफ्ता फैसला के विरुद्ध पटना उच्च न्यायलय द्वारा ख़ारिज की गई है I 
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