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बढ़ाकर नजदीकियां (हिंदी ग़ज़ल)

बढ़ाकर नजदीकियां (हिंदी ग़ज़ल)

अक्सर बढ़ाकर नजदीकियां।
ढूंढते रह गये सब गलतियां।१।
देखते रहे हमारी मुस्कराहट-
कभी सुनी नहीं सिसकियां।२।
हमें अब जरा भी ग़म नहीं है
छोड़ मझधार में कश्तियां।३।
किया नहीं परवाह खुद का-
बद्दुआ दो या कसो फब्तियां।४।
तुम चाहे जो समझ लो मुझे-
पर मिटाता चलूंगा कुरीतियां।५।
मुमकिन है सबभूल जाना-
पर याद रहती है ज्यादतियां।६।
समय बड़ा बलवान होता है -
मत उॅची कर अपनी एडियां।७।
कब किसे हार डाल दें गले -
न जाने किसे पहना दें बेड़ियां।८।
मानवता के नाते भी समझाकर -
जरुरतमंद की जरा मजबूरियां।९।
देखकर'मिश्रअणु'को मत हॅस-
इतनी याद रख लें पंक्तियां।१०।
        ---:भारतका एक ब्राह्मण.
       ©संजय कुमार मिश्र "अणु"
          वलिदाद,अरवल (बिहार)
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