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एनआईटी में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन से लेकर इलेक्ट्रिक सब स्टेशन निर्माण तक में धांधली

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पटना में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन से लेकर इलेक्ट्रिक सब स्टेशन निर्माण तक में धांधली हुई है। वित्तीय अनियमितता का खेल सिर्फ अभी ही नहीं बल्कि पहले भी चलता रहा है। हर साल ऑडिट में ये गड़बड़ियां सामने आती रही हैं। वर्ष 2017-18 में हुए ऑडिट में ऑडिटर ने बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रिक सब स्टेशन के निर्माण में धांधली पकड़ी थी। फ्लैट पर अनियमित खर्च के मामले भी सामने आए हैं। जो काम फ्री में हाेना था उसके लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं हुई।
वर्ष 2017-18 की ऑडिट रिपोर्ट की मानें तो मॉड्यूलर एकेडमिक ब्लॉक के निर्माण के लिए कोई स्पेस ही संस्थान के पास नहीं था, लेकिन इसके निर्माण के लिए एक कंपनी को 2.64 करोड़ रुपए कंसल्टेंसी फीस के तौर पर दिए गए। कैंपस में जुलाई 2008 तक तीन मॉड्यूलर ब्लॉक का निर्माण करना था, जिसके लिए एक कंपनी को कंसल्टेंसी के तौर पर हायर किया गया। पर्स्पेक्टिव प्लान के अप्रूवल के 20 महीने के बाद कैंपस डेवलपमेंट और रेनोवेशन के लिए एक कंसलटेंसी का हायर की गई। कंसल्टेंसी ने एनआईटी पटना के सहयोग से जून 2010 तक काम पूरा करने का शेड्यूल तय किया।

टाइम फ्रेम के अनुसार 31 अगस्त 2008 तक कंस्ट्रक्शन के लिए मैप और अन्य प्लान को नगर निगम व अन्य अथॉरिटी से अप्रूव कराना था, लेकिन यह 2010 में अप्रूव हुआ। इस आधार पर एनआईटी पटना ने प्रिलिमिनरी इस्टीमेट को एक साल बाद सितंबर 2011 में अप्रूव किया। इसके बावजूद 3 मॉड्यूलर एकेडमिक ब्लॉक का काम शुरू नहीं हुआ, इसके लिए जो स्पेस की पहचान की गई थी उसका उपयोग स्टाफ क्वार्टर के निर्माण के लिए किया जा रहा था, एकेडमिक के लिए कोई जगह ही नहीं थी। लेकिन बावजूद इसके 2. 64 करोड़ रुपए कंसल्टेंसी फीस के ताैर पर दिए गए।

‘इंडस्ट्री इंटरेक्शन कम एंटरप्रेन्योरशिप सेल बिल्डिंग निर्माण सही नहीं’

इसके अलावा एनआईटी पटना में इलेक्ट्रिक सबस्टेशन डीजी सेट के निर्माण के लिए 55685920 रुपए की स्वीकृति दी गई दी गई। इस इस्टीमेट में 11 केवी फीडर का कॉस्ट भी एड था। एनआईटी पटना के रिकॉर्ड की स्क्रूटिनी में यह सामने आया कि निदेशक ने उक्त राशि की स्वीकृति सितंबर 2014 में दे दी और 33 प्रतिशत फंड सीपीडब्ल्यूडी को रिलीज कर दिया गया। आगे की स्क्रूटिनी में पता चला कि साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड 33/11 केवी के पावर सबस्टेशन के फ्री निर्माण के लिए सहमत थी।

इसमें एनआईटी को सिर्फ जगह देनी थी। लेकिन इसके बावजूद एनआईटी ने सीपीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिक सर्किल को 21000000 रुपए दिए। एनआईटी में इंडस्ट्री इंटरेक्शन कम एंटरप्रेन्योरशिप सेल बिल्डिंग निर्माण के लिए 6164350000 रुपए खर्च किए। मई 2016 में इसका निर्माण हो गया, लेकिन जनवरी 2018 तक इसका कोई उपयोग नहीं हुआ। इसलिए ऑडिट टीम ने इस निर्माण पर खर्च किए पैसे को सही नहीं बताया है।



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NIT rigged from building construction to electric sub station construction


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/nit-rigged-from-building-construction-to-electric-sub-station-construction-127478921.html

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