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करने को उद्धार

करने को उद्धार

~जयराम जय,कानपुर

सबसे पहले खोलकर,किया बहुत उपकार
'डबल'दाम में दे रहा,था दारू दुतकार

मंदिर मस्ज़िद के नहीं,खुले अभी हैं द्वार
मदिरालय के खुल गये,करने को उद्धार

मस्ती में हैं चूर सब,उस बस्ती के लोग
बहुत दिनों के बाद फिर,महुवा का संयोग

चिन्ता उनको बस यही,डूब रहा व्यापार
आखिर दिन कितने सहे, घाटे के सरकार

अर्थ व्यवस्था हो गई ,उसकी बड़ी खराब
राजा कहता इसलिये,पीने लगो शराब

जमकर अब तो पीजिये,पियो नहीं दो घूंट
कल की करवट क्या पता,बैठेगा किस ऊँट

बोतल लेकर दो चले, वर्दी में दीवान
'कोरोना' से जंग की,जिनके हाथ कमान