बिहार (कविता)
ये मेरे बिहार-
तुझे क्या हो गया?
जब सारी धरती पडी थी,
अज्ञान की गहरी निंद्रा में।
उस समय जगमग-जगमग-
नवगीत सुनिया तंद्रा में।
ओ ज्ञान विज्ञान तेरा आज-
कहां खो गया?
संसार के प्रथम लोकतंत्र है,
एकमात्र तेरा हीं देन।
खगोल-भूगोल अर्थ मुद्रा-
विद्या विभूति ये येनकेन।
क्या क्या होना था और-
ये क्या हो गया?
गौतम,महावीर या आर्यभट्ट-
हो अशोख या शेरशाह।
तेरे हरेक सपुत ने दिया है-
मानवता को नई राह।
चंपारण के रण से हीं
मोहन महात्मा हो गया!!
तुम भूमि हो वंदन की-
जन जन के अभिनंदन की।
तेरी मिट्टी के सुगंध से तो-
है तुक्ष्य गंध चंदन की।
हर तरह के पाप ताप-
एक फल्गु धो गया!!
ये मेरे बिहार-
तुझे क्या हो गया?
---:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र"अणु"

