मौलिक अधिकारों के नाम पर मनुवादियों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा समानता परिषद
राजस्थान पत्रिका के प्रमुख संपादक श्री गुलाब कोठारी जी के समर्थन में आगे आए सवर्ण संगठन ।
मध्यप्रदेश आरक्षण विरोधी आंदोलन के प्रभारी एंव सामाजिक संगठन समानता परिषद के अध्यक्ष पंडित रावेन्द्र तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि राजस्थान पत्रिका के प्रमुख संपादक श्री गुलाब कोठारी जी द्वारा आरक्षण ब्यवस्था पर लिखित लेख अभिव्यक्ति की आजादी है जो हालिया मे माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा आरक्षण ब्यवस्था पर दी गई प्रतिक्रिया पर भी सही बैठता है ।
परंतु कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा श्री कोठारी जी के लेख को लेकर उन्हें धमकियाँ दी गई है जो बेहद ही चिंता जनक है साथ ही राजस्थान पत्रिका द्वारा प्रकाशित प्रतियों को भी जलाया गया है जो सीधे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हत्या करने जैसा प्रयास है ।
पंडित रावेन्द्र तिवारी ने कहा कि आरक्षण विरोधी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक यूँ एस राना ठाकुर संचालक पं,श्री त्रिभुवन शर्मा राष्ट्रीय आरक्षण विरोधी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष पं,अवधेश कुमार मिश्रा सवर्ण लिबरेशन फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं,दीन दयाल त्रिपाठी अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ई श्री एम नागराज एल पी लतूरी सरदार बलबंत सिंह खालसा पंजाब की संयुक्त समिति के द्वारा इस घटना को गंभीरता से लेते हुए आगामी दिनों में जन आन्दोलन चलाने का निर्णय लिया गया है ।
समिति के सदस्य पंडित श्री त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि आरक्षण ब्यवस्था के अब तक के इतिहास में अनेकों बार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा बीच बीच में टिप्पणी की गई किन्तु बोट बैन्क की राजनीति ने समानता के अधिकार के लिए दिये गये आरक्षण ब्यवस्था को मौलिक अधिकार बनाने की कोशिश की जा रही है जिसके कारण एक तरफ जहाँ वर्ग संघर्ष बढ़ रहा है तो वही दूसरी तरफ देश से प्रतिभा का पलायन भी हो रहा है
पंडित अवधेश कुमार मिश्रा ने कहा कि यदि 70 वर्षों से दलित व पिछड़ा वर्ग का एक भी परिवार समानता का अधिकारी नहीं बन पाया तो इस ब्यवस्था को अविलंब खत्म कर संरक्षण की ब्यवस्था को लागू किया जाना चाहिए ।
आन्दोलन के राष्ट्रीय संयोजक यूँ एस राना ठाकुर ने कहा कि 1931 की जनसंख्या के गणना को आधार बनाकर मंडल कमीशन की सिफारिश को लागू करना और आज तक समीक्षा नहीं करना दुर्भाग्य पूर्ण है ।
यदि जल्द ही आरक्षण तथा दलित एक्ट जैसे नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो सोसल मीडिया के इस युग में अफवाहों के साथ देश गृह युद्ध की तरफ जाएगा जिसके लिए देश के समस्त राजनीतिक दल जिम्मेदार होंगे ।
पंडित दीन दयाल त्रिपाठी ने कहा कि मीडिया के लेख को जलाया जाना बेहद निंदनीय कदम है इससे मीडिया का मनोबल टूटेगा श्री एल पी लतूरी ने कहा कि मनु स्मृति एक पवित्र ग्रंथ है अतः इसे जलाया जाना या इसके समर्थकों को अपमानित करना आरोप प्रत्यारोप लगाना नीति संगत नहीं है हम मौन नहीं रहेंगे जरूरत पड़ी तो हम सभी मिलकर सड़कों पर आन्दोलन करेंगे ।
