कुछ नहीं से कुछ हुआ, अच्छा हुआ,
निराशा में आस दीपक, अच्छा हुआ।जीत कर फलक तक तो जा न सके,
फ़ासला कुछ कम हुआ, अच्छा हुआ।
जाँच ली सामर्थ्य अपनी, दूसरे की भी,
मुक़ाबला कुछ कड़ा रहा, अच्छा हुआ।
हारा वही हार जिसने मान ली समर में,
गिरकर उठने का हौसला, अच्छा हुआ।
कल फलक अपना रहेगा, यह तय है,
संघर्ष की भट्टी में तपा हूँ, अच्छा हुआ।
बहुत बेहतर अनेकों से, यहाँ तक आये,
हार कर भी सराहे गये हैं, अच्छा हुआ।
हारे हुये को जीता बताया, निर्णायकों ने,
कुछ चेहरों से नक़ाब उतरा, अच्छा हुआ।
जो निरन्तर संघर्षशील हैं, वह ही टिकेंगे,
शीर्ष पर पहुँच कर ठहरना, अच्छा हुआ।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8



0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews