Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

बोलने की सभी समस्याएँ दूर हो सकती हैं स्पीचथेरापी से

बोलने की सभी समस्याएँ दूर हो सकती हैं स्पीचथेरापी से

  • हेल्थ इंस्टिच्युट में आयोजित हुआ 'विश्व श्रवण दिवस' समारोह, सम्मानित हुए श्रवण एवं वाक् वैज्ञानिक
पटना, १० अक्टूबर। आधुनिक तकनीक से संपन्न आज की स्पीच थेरापी से बोलने की सभी समास्याओं का निदान किया जा सकता है। जिनके कंठ से शब्द नहीं फूटते, ध्वनि स्पष्ट नहीं निकलती, जो हकलाते, तुतलाते हैं वे सभी अब आम लोगों की भाँति साफ़-साफ़ बोल सकते हैं। 'कृत्रिम कान-प्रत्यारोपण' कर अब साल भर के छोटे बहरे बच्चों को भी सुनाया जा सकता है। भविष्य में अब कोई गुंगा-बहरा नहीं रहेगा।

यह बातें शनिवार को, 'विश्व श्रवण दिवस' के अवसर पर बेउर स्थित इंडियन इंस्टिच्युट ऑफ हेल्थ एडुकेशन ऐंड रिसर्च में आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि उनके संस्थान ने ऐसे अनेक व्यक्तियों को पूरी तरह स्वस्थ किया, जिन्होंने नहीं बोल पाने के कारण आत्म-हत्या तक करने की चेष्टा की थी। यह सिद्ध करता है कि समाज में एक श्रवण और वाक् वैज्ञानिक का कितना बड़ा महत्त्व है। यह गौरव का विषय है कि बिहार में इसी एक संस्थान में इस विषय में स्नातक स्तर का प्रशिक्षण दिया जाता है।

समारोह का उद्घाटन करते हुए, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्त्ति राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि परमात्मा द्वारा मनुष्य को प्रदत्त पाँच इंद्रियों में श्रवण की क्षमता सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। यदि आप कुछ सुन नहीं सकते और बोल नहीं सकते, तो कुछ भी न तो समझ सकते हैं, और न अपने विचारों को अभिव्यक्त कर सकते हैं। इन समास्याओं को दूर करने वाला कोई चिकित्सक अवश्य ही आदरणीय और महत्त्वपूर्ण है।

सुप्रसिद्ध वाक् एवं श्रवण वैज्ञानिक डा धनंजय कुमार ने कहा आज जन्म के प्रथम दिन ही यह पता लगाया जा सकता है कि नवजात शिशु सुनने की क्षमता रखता है अथवा नहीं। यदि समय पर उपचार और पुनर्वास हो जाए तो किसी को पता भी नहीं चलेगा कि बच्चा गूँगा-बहरा है। क्योंकि वह बहरा नहीं रहेगा। और, बहरा नहीं रहेगा तो गूँगा भी नहीं होगा।

इस अवसर पर संस्थान की ओर से श्रवण-वैज्ञानिक डा धनंजय कुमार, स्पीच पैथोलौजिस्ट डा अदिति शेखर तथा डा नेहा कुमारी को संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ ने अंग-वस्त्रम और प्रतीक-चिन्ह देकर सम्मानित किया। संस्थान के छात्र-छात्राओं, यश वर्धन, आकाश यादव, संतोष प्रसाद, मातृका प्रकाश, प्रिंस कुमार, प्रिंस राज, रोहित कुमार, अभिषेक कुमार, अंकित कुमार, ऋचा कुमारी, पूजा कुमारी, रवि कुमार तथा अरफ़ा फ़ैज़ ने पोस्टर प्रदर्शिनी लगाकार, कान की अनेक समस्याओं के वैज्ञानिक निराकरण का प्रदर्शन किया।

मंच का संचालन डा संतोष कुमार सिंह ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन संस्थान के छात्र-कल्याण-संकायाध्यक्ष अधिवक्ता अहसास मणिकान्त ने किया। प्रो संजीत कुमार, डा रूपाली भोवाल, प्रो नीतीश भार्गव, प्रो चंदा कुमारी, प्रो देवराज, सूबेदार संजय कुमार समेत बड़ी संख्या में संस्थान के कर्मी एवं छात्रगण उपस्थित थे।

हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ