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नया भारत

नया भारत

मुर्दों का देश नहीं, जिन्दादिलों की बस्ती है,
शान्ति की बात मगर, यहाँ वीरों की हस्ती है।
बढ़ा गए दुकान वह, जो मौन रहकर सहते थे,
सरहद पर सैनिकों की, मौत से भी मस्ती है।

जब जब आँख उठी भारत पर, हमने घुसकर मारा है,
चीन पाक अमेरिका, हमने दुश्मन को ललकारा है।
डर नही लगता हमको यारों, दुश्मन के हथियारों से,
विश्व जानता अपनी ताकत, हमने उनको संहारा है।

बिना लडे भी युद्ध क्षेत्र में, सबको धूल चटाई है,
समझ रहे थे खुद को दादा, उनको औकात बताई है।
कुटनीति या रणनीति हो, हमने दुनिया को समझाया,
आत्मनिर्भर बनकर भी, प्रतिभा की पहचान कराई है।

डॉ अ कीर्तिवर्धन
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