डॉ. निक्की शर्मा ‘रश्मि’ की पुस्तक ‘मानवता की सुगंध : संत सौरभ’ का कवर पेज मुंबई में लोकार्पित
डॉ. निक्की शर्मा ‘रश्मि’ की पुस्तक ‘मानवता की सुगंध : संत सौरभ’ का कवर पेज मुंबई में लोकार्पित

- वर्ल्ड रिकॉर्ड साहित्यिक पहल के तहत 28वें दिन 28वीं अंतरराष्ट्रीय पुस्तक का विमोचन, मानवता, सेवा, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को साहित्य के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास
मुंबई, महाराष्ट्र। साहित्य, समाजसेवा और मानवीय मूल्यों को समर्पित वर्ल्ड रिकॉर्ड साहित्यिक पहल के क्रम में 28वें दिन 28वीं अंतरराष्ट्रीय पुस्तक के रूप में डॉ. निक्की शर्मा ‘रश्मि’ की पुस्तक ‘मानवता की सुगंध : संत सौरभ’ का कवर पेज मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में लोकार्पित किया गया। यह साहित्यिक आयोजन मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सद्भाव और सेवा-भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। पुस्तक के माध्यम से मानवता, करुणा, प्रकृति संरक्षण, सर्वधर्म सद्भाव और विश्व-एकता जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को साहित्यिक अभिव्यक्ति प्रदान करने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक ‘मानवता की सुगंध : संत सौरभ’ में सौहार्द शिरोमणि संत सौरभ जी महाराज के जीवन-दर्शन, मानवीय चिंतन, आध्यात्मिक दृष्टिकोण और समाज के प्रति उनके सेवा-भाव को केंद्र में रखा गया है। संत सौरभ जी महाराज के विचारों में मानवता को सर्वोपरि स्थान देते हुए आपसी प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान की भावना को महत्वपूर्ण माना गया है। पुस्तक का मूल उद्देश्य इन विचारों को साहित्य के माध्यम से व्यापक समाज तक पहुँचाना तथा पाठकों को मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करना है।

वर्तमान समय में जब सामाजिक जीवन में अनेक प्रकार की चुनौतियाँ दिखाई देती हैं, तब मानवता, संवेदनशीलता और पारस्परिक सहयोग का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे परिवेश में यह कृति समाज को सेवा, सद्भाव और सह-अस्तित्व की भावना से जोड़ने का संदेश देती है। पुस्तक में प्रस्तुत विचारों के माध्यम से यह रेखांकित करने का प्रयास किया गया है कि मनुष्य की वास्तविक पहचान केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति उसके व्यवहार, सहयोग और संवेदनशीलता से भी होती है।
इस कृति का एक प्रमुख पक्ष पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति मानवीय दायित्व है। प्रकृति को सुरक्षित रखना, पर्यावरण के संतुलन के प्रति सजग रहना और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण का निर्माण करना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं। पुस्तक की विषयवस्तु इन सरोकारों को मानवीय चिंतन से जोड़ते हुए समाज में सकारात्मक चेतना विकसित करने का संदेश देती है। इसके साथ ही सर्वधर्म सद्भाव और विश्व-एकता की भावना को भी प्रमुखता दी गई है, जिससे विभिन्न विचारों, परंपराओं और समुदायों के बीच परस्पर सम्मान तथा सहयोग की संस्कृति को बल मिल सके।
मुंबई में आयोजित कवर पेज लोकार्पण कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर काजल विपिन कुमार, कनिकिया मंडल महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष; मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय से संबंधित पीएसआई जितेंद्र कुमार; आशीष पी. गुप्ता; अनुष्का शर्मा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों की सहभागिता ने इस साहित्यिक पहल को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।
पुस्तक की लेखिका डॉ. निक्की शर्मा ‘रश्मि’ लेखन, पर्यावरण संरक्षण और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी यह कृति साहित्य को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम न मानकर सामाजिक जागरूकता और मानवीय चेतना के विस्तार का साधन बनाने की दिशा में एक प्रयास है। पुस्तक के विषय और उद्देश्य से यह संदेश उभरकर सामने आता है कि साहित्य की सार्थकता तभी व्यापक होती है, जब वह समाज को सकारात्मक दिशा देने, संवेदनाओं को जागृत करने और मानवीय संबंधों को सुदृढ़ बनाने में योगदान करे।
इस पुस्तक का प्रकाशन गीता ज्ञान इंटरनेशनल पब्लिकेशन एवं दिव्य प्रेरक कहानियां ई-प्रकाशन द्वारा किया गया है। इसे संत सौरभ जी महाराज के जीवन-दर्शन और मानवीय विचारों पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक श्रृंखला की 28वीं कड़ी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्ल्ड रिकॉर्ड साहित्यिक पहल के अंतर्गत 28वें दिन 28वीं अंतरराष्ट्रीय पुस्तक के रूप में इसका कवर पेज लोकार्पित होना इस श्रृंखला की निरंतरता और साहित्यिक गतिविधियों के विस्तार को रेखांकित करता है।कुल मिलाकर, ‘मानवता की सुगंध : संत सौरभ’ एक ऐसी साहित्यिक कृति के रूप में प्रस्तुत की गई है, जो मानवता, करुणा, सेवा, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे मूल्यों को केंद्र में रखती है। पुस्तक का संदेश है कि समाज में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन के लिए केवल विचारों की चर्चा पर्याप्त नहीं, बल्कि उन विचारों को अपने आचरण और व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है। मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने और सद्भावपूर्ण समाज की कल्पना को बल देने की दिशा में यह कृति साहित्य जगत की एक उल्लेखनीय पहल है।
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