जमीर

जमीर

जय प्रकाश कुवंर
चाहे कोई गरीब हो या फिर हो अमीर।
मनुष्य वही है जिसका जिंदा है जमीर।।
भरे समाज में लोग बड़े बात करते हैं।
बड़े बनने के लिए जमीर का सौदा करते हैं।।
किसी का बड़ा बनना उनको भाता नहीं है।
बड़े की बड़ाई करना उनको आता नहीं है।।
या तो यह उनका पैदाइशी लक्षण है,
या फिर बुरे लोगों के संगत का प्रभाव है।
या फिर अंतरात्मा ने नैतिक बोध खो दिया है,
ऐसे जमीर बेंचने वालों का नहीं अभाव है।।

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