साथ मिला तेरा तो प्रणय के प्रसून खिले

साथ मिला तेरा तो प्रणय के प्रसून खिले

कुमार महेंद्र
मौन हृदय की रागिनी में,
तुमने भरा मधुर संगीत।
सूनी थीं जीवन की राहें,
तुमसे जागी मृदुल प्रीत।
तुमने पग धर मन-उपवन में,
स्वप्न सजाए रंगीले।
साथ मिला तेरा तो प्रणय के प्रसून खिले।।


चितवन में सावन बरसा,
अधरों पर मधुहास।
तुम जो आईं जीवन में,
हर पल बना मधुमास।
नयन-नयन की भाषा में,
प्रेम के अनगिन अर्थ मिले।
साथ मिला तेरा तो प्रणय के प्रसून खिले।।


तुम मेरी आराधना हो,
तुम ही मेरी वंदना।
तुमसे जीवन-सुर सजते,
सार्थक मेरी साधना।
सात जन्म तक साथ निभाएँ,
प्रेम के दीप सदा जले।
साथ मिला तेरा तो प्रणय के प्रसून खिले।।


मैं चाँद-सा सौम्य शीतल,
तुम ज्योत्स्ना की बरसात।
तुमसे ही रोशन जीवन,
तुमसे मधुर हर रात।
सुख-दुख की हर राह में,
महकें नेह के सिलसिले।
साथ मिला तेरा तो प्रणय के प्रसून खिले।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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