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ओझल हुआ आज, सिने जगत का ध्रुव तारा

ओझल हुआ आज, सिने जगत का ध्रुव तारा

कुमार महेंद्र
विश्वनाथ से आरंभ हुआ,
संघर्षों का लंबा सफर।
रंगमंच की पावन मिट्टी में,
निखरा अभिनय का हुनर।
कड़क आवाज़, देसी तेवर,
संवादों में अंगार-धारा।
ओझल हुआ आज, सिने जगत का ध्रुव तारा।।


‘परिंदा’ में खौफ जगाया,
‘क्रांतिवीर’ की शान बने।
‘तिरंगा’ की आन बने वे,
भारत माँ के मान बने।
‘नटसम्राट’ के अभिनय ने,
हर आँख से बहाई अश्रुधारा।
ओझल हुआ आज, सिने जगत का ध्रुव तारा।।


न अभिनय में बनावट थी,
न शब्दों में कोई आडंबर।
चेहरे पर सहज भाव लिए,
जीते थे हर एक चरित्र।
साधारण-सी छवि में छिपा,
असाधारण था वह फनकारा।
ओझल हुआ आज, सिने जगत का ध्रुव तारा।।


सिर्फ रुपहले परदे तक ही,
सीमित नहीं था उनका संसार।
दीन-दुखी के दर्द को समझा,
रखा हृदय में उनका भार।
किसानों की पीड़ा पर भी,
पिघल उठता था मन सारा।
ओझल हुआ आज, सिने जगत का ध्रुव तारा।।


बेबाकी उनकी पहचान रही,
सच कहना उनका स्वभाव रहा।
कठिन समय में भी निर्भीक रहे,
सदा सत्य का साथ रहा।
सादगी के उजले आँगन में,
बसता था मन उनका प्यारा।
ओझल हुआ आज, सिने जगत का ध्रुव तारा।।


आज मौन हुई वह गर्जन-ध्वनि,
थम गई वह सशक्त पुकार।
स्तब्ध हुआ है सिने-जगत,
नयन हुए हैं अश्रुधार।
पर अभिनय की अमिट विरासत से,
फैलेगा युग-युग तक उजियारा।
ओझल हुआ आज, सिने जगत का ध्रुव तारा।।


रुपहले परदे से दूर गए वे,
पर दिल से दूर कहाँ होंगे।
उनके जीवंत चरित्र सदा ही,
हम सबके संग खड़े होंगे।
कला-साधना की अमर ज्योति,
जलती रहेगी बनकर सितारा।
ओझल हुआ आज, सिने जगत का ध्रुव तारा।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
(सिने जगत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर जी के आकस्मिक निधन पर कुछ पंक्तियाँ विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में अर्पित हैं। 🙏🙏)
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