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प्यार का दीप जलाओं

प्यार का दीप जलाओं

संजय जैन
दीप मोहब्बत के मैं
दिल में जलता हूँ।
स्नेह प्यार की गंगा
घर-घर में बहता हूँ।
दिल में पड़े गये जो
बीज नफरत के।
उन्हें मिटाने को मैं
प्रेम बरसात हूँ...2।
दीप मोहब्बत के मैं...।।


दीन दुखी के दिलो में
आस जगता हूँ।
मूरझाये चेहरो को
फूल सा खिलाता हूँ।
दिलमें पड़े अंधेरे को
रोशन करता हूँ।
हँसी-खुशी का माहौल
दिलों में बनता हूँ।
दीप मोहब्बत के मैं...।।


दर्द भरा हो खुद में
फिर भी दिखता नही।
हँसते हुए चेहरे से
सब को हँसता हूँ।
मानव धर्म की परिभाषा
सब को बतलाता हूँ।
और मानव होने का
कर्तव्य निभाता हूँ।।
दीप मोहब्बत के मैं
दिलों में जलता हूँ।
स्नेह प्यार की गंगा
घर घर में बहता हूँ।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन " बीना" मुंबई
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