दशहरा

दशहरा

जय प्रकाश कुवंर
एक और दशहरा बीत गया।
इस बार दिखा कुछ नया नया।।
हर साल तो रावण जलता था।
श्रीराम का रथ निकलता था।।
इस बार रावण वध में,
एक और नजारा दिख पड़ा।
रावण, कुम्भकर्ण, मेघनाद, के साथ,
चौथी आधुनिक बुराई का पुतला,
काक्रोच का पुतला रहा खड़ा।।
ये सारे बुराई के द्योतक,
खड़े खड़े एक साथ जले।
पृथ्वी से घोर बुराई का अंत कर,
जनमानस आपस में गले मिले।।
हर युग में बुराई आता है।
किसी न किसी अवतारी के हाथों,
समय पर अंत उसका हो जाता है।।
आओ मिलकर विजयदशमी की,
हम सब खुशी मनायें।
इस धरती से बुराई को भगाकर,
इस धरती को स्वर्ग बनायें।।
विजयदशमी की सबों को
शुभकामनाएँ 🙏🙏
जय प्रकाश कुवंर
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