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माँ कूष्मांडा के श्रीचरण, खुशियों की बौछार

माँ कूष्मांडा के श्रीचरण, खुशियों की बौछार

कुमार महेंद्र
चतुर्थ दिवस की पावन बेला,
भक्ति-सुमन का सजा श्रृंगार।
माँ कूष्मांडा की महिमा से,
गूँजे घर-घर जय-जयकार।
मंद-मंद मुस्कान तुम्हारी,
करती भव-दुख से उद्धार।
माँ कूष्मांडा के श्रीचरण, खुशियों की बौछार।।


अष्टभुजाधारी रूप मनोहर,
दिव्य छवि अनुपम सुखकारी।
कर कमल आयुध सोहे,
महिमा तेरी सबसे न्यारी।
सूर्यमंडल में वास तुम्हारा,
तेज-पुंज जगमग संसार।
माँ कूष्मांडा के श्रीचरण, खुशियों की बौछार।।


कमंडल, धनुष-बाण सुशोभित,
चक्र, गदा की छटा निराली।
कमल, जपमाला, अमृत-कलश से,
शोभित माँ की छवि मतवाली।
श्रद्धा से जो शीश झुकाते,
करती उनका बेड़ा पार।
माँ कूष्मांडा के श्रीचरण, खुशियों की बौछार।।


मंद हास से सृष्टि रचाई,
कण-कण में नवजीवन भरतीं।
तम के सीने को चीरकर मैया,
ज्ञान-ज्योति से जगमग करतीं।
ब्रह्मांडों की आदि जननी,
महिमा तेरी अपरंपार।
माँ कूष्मांडा के श्रीचरण, खुशियों की बौछार।।


हरित वर्ण की छवि मनभावन,
करुणा का निर्मल भंडार।
भक्तजनों के कष्ट मिटाकर,
करतीं सुख का नव संचार।
दैहिक, दैविक, भौतिक तापों से,
माँ कर दो सबका उद्धार।
माँ कूष्मांडा के श्रीचरण, खुशियों की बौछार।।


आदि शक्ति, हे जगत्-जननी,
सुन लेना विनती हमारी।
सुख-समृद्धि से भर दो मैया,
महके जग की फुलवारी।
तेरी कृपा बनी रहे माँ,
सर्वत्र मंगलमय बहार।
माँ कूष्मांडा के श्रीचरण, खुशियों की बौछार।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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