भारतीय पुलिस दिवस
अरुण दिव्यांशएक वर्दी यह सीमा प्रहरी ,
एक वर्दी है जनता रक्षक ।
परिवार समाज को तज ,
रक्षा करते बनकर तक्षक ।।
जिस कारण हम निर्भीक ,
जिससे स्वतंत्र समाज है ।
धन जन जिससे सुरक्षित ,
प्रहरी प्रखर उच्च ताज है ।।
ऊॅंच नीच है भाव भगाता ,
छुआछूत है भाव मिटाता ।
कानूनी सर्वत्र न्याय फैला ,
कर्म निष्ठा को है जगाता ।।
धन्य धन्य तेरा यह जीवन ,
धन्य तेरा ये कर्म वर्दीधारी ।
जो पल होता तुमसे वंचित ,
सुरक्षित होते व्यभिचारी ।।
एक वर्दी से सुरक्षित राष्ट्र ,
एक वर्दी सुरक्षित जनता ।
तुझको नमन हे वर्दीधारी ,
अपराधी दुश्मनों के हन्ता ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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