बबराला प्रांतीय आर्य महासम्मेलन : पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा लागू कराने की की गई मांग

बबराला प्रांतीय आर्य महासम्मेलन : पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा लागू कराने की की गई मांग

बबराला। यहां चल रहे प्रांतीय आर्य महासम्मेलन में प्रथम दिन के दूसरे सत्र में वेद सम्मेलन में प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा मंत्री श्रीमती गुलाब देवी उपस्थित हुईं। वेद सम्मेलन की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा की न्याय सभा के प्रधान न्यायाधीश डॉ राकेश कुमार आर्य द्वारा की गई। स्वामी धर्मानंद जी के संयोजकत्व में किए जा रहे इस प्रांतीय आर्य महासम्मेलन के प्रथम सत्र में आर्य जगत के सुप्रसिद्ध भामाशाह ठाकुर विक्रम सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए आर्य विचारों के प्रचार प्रसार पर बल दिया और युवा पीढ़ी का आवाहन किया कि वह महर्षि दयानंद के प्रेरक और चुंबकीय व्यक्तित्व से शिक्षा लेते हुए संसार का भला करने के लिए मैदान में आएं। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी युवा पीढ़ी को देश, धर्म और संस्कृति के प्रति समर्पित नहीं कर पाता है वह सभ्यताओं की दौड़ में पीछे रह जाता है। इसलिए वर्तमान नेतृत्व को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित रहे महात्मा जितेन्द्र भाटिया ने नैतिक मूल्यों में हो रहे पतन को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सभी देशवासियों से आर्य समाज के साथ जुड़कर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वेद की नैतिक शिक्षा मनुष्य को मनुष्य बनाती है और जब वह मनुष्य बन जाता है तभी उसकी आर्यत्व की साधना का शुभारंभ होता है। यही अंत में उसे मोक्ष तक ले जाता है। इसलिए नैतिकता को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना आवश्यक है। स्थानीय विधायक श्री अजीत कुमार जी उर्फ राजू यादव ने अपने संबोधन में कहा कि महर्षि दयानंद के विचार आज भी सार्थक हैं। वेद ही संसार की सबसे प्राचीन पुस्तक है। वेद के नैतिक मूल्य ही संसार और समाज का कल्याण कर सकते हैं। वेद से दूर होकर ही संसार में वेदना का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि वेद संसार की प्राचीन पुस्तक होने के साथ-साथ श्रेष्ठ पुस्तक भी है। वास्तव में यदि कोई धर्म ग्रंथ कहा जा सकता है तो वह वेद ही हो सकता है। क्योंकि वेद मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने की शिक्षा देता है और यही धर्म का आचरण है।
आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के प्रधान स्वामी स्वदेश जी महाराज ने अपने वक्तव्य में कहा कि राम और कृष्ण के चरित्र की वास्तविक पूजा आर्य समाज करता है । दूसरे लोग चित्र की पूजा करते रह गए जबकि चरित्र की पूजा करने वाले आर्य समाज ने अनेक राष्ट्रभक्तों का निर्माण कर उनके भीतर राम और कृष्ण की देशभक्ति और वेद भक्ति का संचार कर दिया। वास्तव में इसी प्रकार के चरित्र पूजन से ही राष्ट्र सबल बनता है। राम और कृष्ण की महानता इसी तथ्य में छुपी हुई है कि वह वेद भक्त और ईश्वर भक्त दोनों एक साथ थे। उनकी देशभक्ति संपूर्ण मानवता के लिए की जाने वाली देशभक्ति थी। उस समय राष्ट्र का अभिप्राय संपूर्ण भूमंडल से होता था। इसलिए उन्होंने अपने वैश्विक मानस का प्रयोग करते हुए संसार का उपकार किया। इसी प्रवृत्ति को आज हमें अपने राष्ट्र का मूल स्वभाव बनाना होगा
माध्यमिक शिक्षा मंत्री श्रीमती गुलाब देवी ने कहा कि वह नैतिक शिक्षा और देशभक्ति के चरित्र चित्रण के लिए विद्यालयों के निर्देश दे चुकी हैं कि प्रातः काल में प्रार्थना के पश्चात बच्चों को किसी न किसी महापुरुष अथवा देशभक्त के बारे में बताया जाए ।उन्होंने कहा कि एक ग्रंथ का होना भी समय की आवश्यकता है। द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता रहे उत्तर प्रदेश विद्या आर्य सभा के प्रधान स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने कहा कि भारत ऋषियों का देश है। ऋषियों की पवित्र वाणी से ही संसार का कल्याण संभव है। क्योंकि उनका चिंतन बहुत ही सार्थक और उपयोगी रहा है। उन्होंने जीवन भर वेद का संदेश लोगों को सुनाया । इसी परंपरा को स्वामी दयानंद जी ने आगे बढ़ाया और यही परंपरा अब हमको आगे बढ़ानी होगी। स्वामी दयानंद जी महाराज के शिक्षा संबंधी दृष्टिकोण को यथावत पालन कराया जाना आवश्यक है आज का चरित्र भ्रष्ट हो गया युवा जब तक स्वामी दयानंद जी प्रणीत वेद प्रणाली और गुरुकुल प्रणाली से नहीं जुड़ेगा, तब तक उसकी आत्मा का उत्थान संभव नहीं है।
द्वितीय सत्र के दूसरे मुख्य वक्ता रहे उत्तर प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा की न्यायसभा के प्रधान न्यायाधीश डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि हम इस सम्मेलन के माध्यम से देश प्रदेश की सरकार से मांग करते हैं कि नैतिक शिक्षा और हमारे पूर्वज नामक पुस्तक विद्यालयों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित की जाए। वेद की नैतिक शिक्षा को इसमें प्राथमिकता दी जाए। वेद को राष्ट्र ग्रंथ घोषित किया जाए और जेवर एयरपोर्ट का नाम महर्षि दयानंद जी के नाम पर रखा जाए । डॉक्टर आर्य के प्रस्ताव का हजारों की संख्या में उपस्थित रहे लोगों ने हाथ उठाकर अनुमोदन किया। इससे पूर्व डॉक्टर आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद जी महाराज ने सारे विश्व को वेद का चिंतन देकर स्वराज चिंतन दिया। उनका स्वराज और विदेशियों का लोकतंत्र दोनों अलग-अलग चीज हैं। दुनिया के विचारकों द्वारा दिए गए लोकतांत्रिक विचारों ने करोड़ों लोगों की हत्याएं करवाई हैं जबकि वेद के चिंतन ने स्वराज जैसे शब्दों को देखकर इस मां लोक कल्याण को सर्वोपरि स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि आज 100 से अधिक देशों में हिंदी 600 विश्वविद्यालय या कॉलेज में पढ़ाई जा रही है, यह श्रेय भी स्वामी दयानंद को जाता है। जिन्होंने सत्यार्थ प्रकाश को हिंदी में लिखकर हिंदी की अनुपम सेवा की थी। विमान शास्त्र बनाने की विद्या स्वामी दयानंद जी महाराज ने दी। जिससे आज के यूरोप के लिए आविष्कारों का युग प्रारंभ हो गया। इसके अतिरिक्त राजनीतिक क्षेत्र में भी उन्होंने मनु महाराज का पूरा चिंतन सत्यार्थ प्रकाश में प्रस्तुत कर एक विश्व सरकार का आदर्श लोगों के सामने रखा । इस आदर्श से वर्तमान संयुक्त राष्ट्र संघ का उदय हुआ। यद्यपि इसमें अभी बहुत खामियां हैं । जो कि भारत के लिए चुनौती है। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद जी महाराज के वास्तविक चिंतन को स्थापित करना प्रत्येक आर्य समाजी के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए। जब तक हम महर्षि दयानंद जी के मिशन और विजन को लेकर आगे नहीं बढ़ेंगे, तब तक हम विश्व को एक परिवार नहीं बना पाएंगे और नहीं संसार को आर्य बना पाएंगे।
दूसरे सत्र में भजनोपदेशक के रूप में श्री कैलाश कर्मठ द्वारा भजनों की बहुत ही उत्तम प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए दया शंकर आर्य ( उपाध्यक्ष आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश ) ने बताया कि श्री शिवराज शास्त्री को सम्मेलन का उपाध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्रांतीय अधिवेशन 24, 25 ,26 अक्टूबर अर्थात तीन दिन में संपन्न होगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आर्य समाज की संगठन की शक्ति का पुनर्जागरण है। जिससे कि महर्षि दयानंद जी के सपनों को साकार करते हुए भारत का निर्माण किया जा सके। कार्यक्रम के पहले दिन के द्वितीय सत्र में डॉ हरि सिंह आर्य,डॉ ओम प्रकाश शास्त्री ,
आचार्य शिवराज शास्त्री जी दिल्ली,आचार्या डॉ पवित्रा वेदालंकार सहित कई विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर भाषा प्रचारिणी सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष आर्य सागर, उपाध्यक्ष महावीर सिंह आर्य, मंत्री पंडित धर्मवीर आर्य, हेम सिंह आर्य, शास्त्रार्थ महासभा के जिला अध्यक्ष आचार्य करण सिंह, महाशय रंगीलाल आर्य, विपिन आर्य आदि सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता आचार्य पंकज आर्य द्वारा की गई ,जबकि मंच संचालन राजेंद्र सिंह आर्य द्वारा किया गया।
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