बिहार के कृषि उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार, महिला कृषि उद्यमियों और FPCs को मिलेगी नई उड़ान

- जीविका, सिंजेंटा फाउंडेशन इंडिया और गेट्स फाउंडेशन की पहल से पटना में राज्य स्तरीय “एग्री-आउटपुट मार्केट लिंकेज” कार्यशाला आयोजित|
- धान, गेहूं, मक्का और मखाना सहित प्रमुख कृषि उत्पादों के लिए खरीदारों से सीधे जुड़ाव पर जोर|
- 70 से अधिक उत्पादक कंपनियों और 5,000 से ज्यादा कृषि उद्यमी दीदियों के नेटवर्क को बाजार से जोड़ने की कवायद|
पटना, 11 सितंबर 2026। बिहार के कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, किसानों एवं ग्रामीण महिला उद्यमियों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने तथा किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) को बड़े और संस्थागत बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी उद्देश्य से जीविका द्वारा सिंजेंटा फाउंडेशन इंडिया (SFI) एवं गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से पटना में राज्य स्तरीय “Strengthening Agri-Output Market Linkages for AE and FPC-led Agribusiness Development in Bihar” विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।.jpeg)
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कार्यशाला में कृषि उद्यमियों (Agri-Entrepreneurs), किसान उत्पादक कंपनियों, संभावित संस्थागत खरीदारों, निर्यातकों, रिटेलर्स तथा जीविका एवं सिंजेंटा फाउंडेशन की राज्य एवं जिला स्तरीय टीमों ने भाग लिया। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री हिमांशु शर्मा, अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती अनन्या सिंह तथा सिंजेंटा एवं गेट्स फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
बाजार से जुड़ाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को देगा नई मजबूती : हिमांशु शर्मा
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री हिमांशु शर्मा ने कहा कि कृषि उद्यमियों और किसान उत्पादक कंपनियों के विशाल नेटवर्क को बाजार से जोड़ना केवल व्यापार बढ़ाने की पहल नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि जीविका के माध्यम से बिहार में गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण आजीविका सशक्तीकरण के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया गया है। वर्तमान में जीविका से जुड़े 70 से अधिक उत्पादक कंपनियों और 5,000 से अधिक कृषि उद्यमी दीदियों का नेटवर्क आजीविका, रोजगार एवं आय वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
श्री शर्मा ने कहा कि कृषि उद्यमियों और किसान उत्पादक कंपनियों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता है। ऐसी साझेदारी से कृषि उत्पादों के एकत्रीकरण, गुणवत्ता सुधार, मूल्य संवर्द्धन और बाजार संपर्क को मजबूत आधार मिलेगा। इसका सीधा लाभ बिहार के छोटे एवं सीमांत किसानों को बेहतर बाजार, बेहतर मूल्य और दीर्घकालिक व्यावसायिक अवसरों के रूप में मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसे एक संगठित व्यावसायिक मूल्य श्रृंखला से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उत्पाद तैयार होने के बाद वह किस बाजार तक पहुंचेगा, किस गुणवत्ता में पहुंचेगा और किसान को उसका कितना मूल्य मिलेगा—इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम करना जरूरी है।
कृषि उद्यमी दीदियां अब मूल्य श्रृंखला की सक्रिय भागीदार : अनन्या सिंह
जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती अनन्या सिंह ने कहा कि जीविका से जुड़ी कृषि उद्यमी दीदियां अब केवल कृषि उत्पादन में सहयोग करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि जीविका का प्रयास है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उत्पादन एवं सेवाओं को व्यवस्थित और संगठित कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण बाजारों तथा संस्थागत खरीदारों से जोड़ा जाए। कृषि उद्यमियों और किसान उत्पादक कंपनियों को एक साझा मंच पर लाने से किसानों एवं खरीदारों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क मजबूत होगा और अनावश्यक बिचौलियापन कम करने में मदद मिलेगी।
श्रीमती सिंह ने कहा कि मौसम और बाजार की मांग के अनुरूप फसलों की योजनाबद्ध बुआई किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि किसानों को पहले से बाजार की मांग, गुणवत्ता मानक और संभावित कीमत की जानकारी उपलब्ध हो, तो वे बेहतर व्यावसायिक निर्णय ले सकते हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी व्यवसाय और आय के नए अवसर भी तैयार होंगे।
केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं, पूरी मूल्य श्रृंखला मजबूत करनी होगी : अंजनी कुमार सिंह
गेट्स फाउंडेशन के प्रतिनिधि श्री अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र में किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि backward linkages के माध्यम से किसानों एवं उद्यमियों को गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, वित्तीय सेवाओं और कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराना जरूरी है। वहीं forward linkages के माध्यम से उत्पादों के aggregation, grading, value addition, processing, logistics और संस्थागत खरीदारों तक सीधी पहुंच विकसित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि बिहार में जीविका के कृषि उद्यमियों और किसान उत्पादक कंपनियों के माध्यम से ऐसी एकीकृत कृषि मूल्य श्रृंखला विकसित करने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही बाजार की बेहतर जानकारी और उत्पाद बेचने के अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
धान, गेहूं, मक्का और मखाना पर विशेष फोकस
कार्यशाला में बिहार के प्रमुख कृषि उत्पादों के लिए संरचित और दीर्घकालिक बाजार संपर्क विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। धान, गेहूं, मक्का और मखाना जैसे उत्पादों के लिए संभावित खरीदारों, किसान उत्पादक कंपनियों और कृषि उद्यमियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि किसानों की उत्पादन क्षमता और बाजार की वास्तविक मांग के बीच बेहतर समन्वय कैसे स्थापित किया जाए। इसके साथ ही कृषि उत्पादों के एकत्रीकरण, ग्रेडिंग, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, खरीद प्रक्रिया, भंडारण, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
गुणवत्ता और पैकेजिंग से बढ़ेगी बाजार में प्रतिस्पर्धा
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए केवल उत्पादन की मात्रा ही महत्वपूर्ण नहीं है। उत्पाद की गुणवत्ता, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, समय पर आपूर्ति और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
कृषि उद्यमियों द्वारा वर्तमान में किसानों को इनपुट उपलब्ध कराने, आउटपुट मार्केटिंग, फसल संबंधी सलाह, नर्सरी संचालन तथा अन्य कृषि सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। कार्यशाला में इन सेवाओं को बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप और अधिक व्यवस्थित एवं व्यावसायिक बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
संस्थागत खरीदारों के साथ सीधे जुड़ाव का मंच
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य संभावित संस्थागत खरीदारों, निर्यातकों और रिटेलर्स को बिहार के AE-FPC नेटवर्क से परिचित कराना भी रहा। इसके माध्यम से खरीदारों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उत्पादों की संभावित आपूर्ति, उत्पादन क्षमता और व्यावसायिक अवसरों को समझने का अवसर मिला।
प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार किया कि किसान उत्पादक कंपनियां और कृषि उद्यमी किस प्रकार बड़े खरीदारों की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन एवं आपूर्ति की योजना तैयार कर सकते हैं। साथ ही दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारी के लिए गुणवत्ता, मात्रा, समयबद्ध आपूर्ति और पारदर्शी खरीद प्रक्रिया को मजबूत करने पर बल दिया गया।
सफल कृषि उद्यमियों के अनुभव भी किए गए साझा
कार्यशाला के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर रही कृषि उद्यमी दीदियों के उदाहरण प्रस्तुत किए गए। उनके द्वारा स्थानीय स्तर पर किसानों को उपलब्ध कराई जा रही कृषि सेवाओं, उत्पादों के बाजार से जुड़ाव और व्यवसाय को आगे बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी साझा की गई।
इन उदाहरणों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया कि यदि स्थानीय कृषि उद्यमियों को उचित प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, वित्तीय सहायता और बाजार से सीधा संपर्क उपलब्ध कराया जाए तो वे न केवल स्वयं के लिए रोजगार और आय के अवसर पैदा कर सकती हैं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी बाजार तक पहुंच का माध्यम बन सकती हैं।
“लखपति दीदी” के लक्ष्य को भी मिलेगा बल
कार्यशाला में इस बात को रेखांकित किया गया कि कृषि उद्यमियों की आय और व्यवसाय को मजबूत करने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। बाजार आधारित कृषि उद्यमिता ग्रामीण महिलाओं को केवल आजीविका का साधन ही नहीं देती, बल्कि उन्हें स्थायी व्यवसाय, रोजगार सृजन और आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करती है।
इस दृष्टि से कृषि उद्यमियों और FPCs को मजबूत बाजार से जोड़ने की पहल “लखपति दीदी” जैसे व्यापक ग्रामीण महिला आर्थिक सशक्तीकरण के लक्ष्यों को भी गति देने में सहायक हो सकती है।
टिकाऊ बाजार तंत्र विकसित करने की दिशा में आगे की कार्ययोजना
कार्यशाला के अंत में कृषि उद्यमियों, किसान उत्पादक कंपनियों और बाजार के प्रमुख हितधारकों के बीच संभावित साझेदारियों की पहचान करने तथा आगे की कार्ययोजना पर विचार किया गया।
प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार के कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए उत्पादन से लेकर बाजार तक एक ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिसमें किसान, कृषि उद्यमी, FPC, खरीदार, प्रसंस्करण इकाइयां, रिटेलर और निर्यातक एक-दूसरे से प्रभावी रूप से जुड़े हों।इस पहल से बिहार के किसानों और ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए बेहतर बाजार, बेहतर मूल्य, कम बिचौलियापन, मूल्य संवर्द्धन और दीर्घकालिक व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में नई संभावनाएं बन सकती हैं। कार्यशाला को बिहार में कृषि उत्पादों के लिए मजबूत, संगठित और टिकाऊ बाजार तंत्र विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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