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गुरुदेव की भक्ति

गुरुदेव की भक्ति

भक्ति मैं करता तेरे
साझ और सबेरे।
चरण पखारू तेरे
साझ और सबरे।
चरण पखारू तेरे
साझा और सबरे।
तेरे मंद मंद दो नैन
मेरे मनको दे रहे चैन।
तेरे मंद मंद दो नैन...।

क्या ज्ञान क्या अज्ञानी जन,
आते है निश दिन मंदिर में।
एक समान दृष्टि तेरी
पड़ती है उन सब जन पर।
पड़ती है दृष्टि तेरे उन सब पर।
तेरे कर्णना भर दो नैन
मेरे मनको दे रहे चैन।
तेरी कर्णना भरे दो नैन
मेरे मनको दे रहे चैन।।


त्याग तपस्या की
ऐसे सूरत हो।
चलते फिरते
तुम भगवान हो।
दर्शन जिसको
मिल जाये बस।
जीवन उनका धन्य होता।
जीवन उनका धन्य होता।
तेरा जिसको मिले आशीर्वाद।
उसका जीवन हो जाये कामयाब।
तेरा जिसको मिले आशीर्वाद।
उसका जीवन हो जाये कामयाब।।


ऐसे गुरुवर विद्यासागर के चरणों में
संजय करता उन्हें वंदन,
करता उन्हें शत शत वंदन।।


पर्यूषण महापर्वराज का आज दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म के उपलक्ष्य में मेरा गुरुभक्ति का भजन आप सभी को समर्पित है।


जय जिनेन्द्र
संजय जैन "बीना" मुम्बई
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