"संकल्प और आरम्भ"
पंकज शर्मा
प्रतीक्षा सर्वथा मन का एक छद्म आवरण है, जो हमारी क्षमता और गतिशीलता को शिथिल करती है। जिसे हम प्रायः ‘तैयारी की कमी’ समझकर ठहर जाते हैं, वह वास्तव में ज्ञान का अभाव नहीं, अपितु अंतरआत्मा के आत्मविश्वास का विलंब है। जब तक हम पूर्णता की मिथ्या खोज में उलझे रहते हैं, तब तक समय का अमूल्य क्षण हाथ से निकल जाता है। कार्य की सिद्धि विचार करने में नहीं, बल्कि प्रथम पद आगे बढ़ाने में निहित होती है।
सच्चा आत्मविश्वास किसी पूर्व-तैयारी से नहीं, बल्कि आरम्भ करने के साहस से जन्म लेता है। संकल्प जब कर्म के धरातल पर उतरता है, तब मार्ग की समस्त बाधाएं स्वतः छँटने लगती हैं। इसलिए, संशय की धुंध को छाँटकर अपनी चेतना को जाग्रत करें और नव-निर्माण की दिशा में तत्परता से कदम बढ़ाएं। आरम्भ ही उस सिद्धि की पहली परिणति है, जिसका मार्ग केवल आपके दृढ़ संकल्प से होकर गुज़रता है।
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा एवं संस्कार)
पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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