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बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 'पाइप्ड नैचुरल गैस' की समीक्षा बैठक संपन्न; राज्य के सभी जिलों में नेटवर्क विस्तार और कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 'पाइप्ड नैचुरल गैस' की समीक्षा बैठक संपन्न; राज्य के सभी जिलों में नेटवर्क विस्तार और कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में आज राज्य में पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क की प्रगति की समीक्षा हेतु एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत द्वारा की गई। इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से राज्य के सभी जिलाधिकारी तथा तेल एवं गैस कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने राज्य भर में पाइपलाइन बिछाने और घरेलू पाइप प्राकृतिक गैस कनेक्शन प्रदान करने के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की तथा अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने का निर्देश दिया।


1. राज्य में नेटवर्क का विस्तार (28 जिले गैस से जुड़े):
o बिहार के कुल 38 में से 28 जिलों (~74%) में CGD नेटवर्क स्थापित/गैसीकृत हो चुका है।
o पिछली समीक्षा बैठक के बाद से 5 नए जिलों—शिवहर (27.08.2026), सीतामढ़ी (27.08.2026) तथा बक्सर (02.09.2026) सहित—को सफलतापूर्वक नेटवर्क से जोड़ा गया है।
o राज्य में अब तक 1,52,686 से अधिक घरेलू PNG (D-PNG) कनेक्शन लाइव हो चुके हैं, जो मार्च 2026 तक के लक्ष्य का लगभग 40.44% है।

2. गैर-गैसीकृत और बिना इंफ्रास्ट्रक्चर वाले जिलों के लिए कार्य योजना:
o कैमूर (भभुआ): स्टील इंफ्रास्ट्रक्चर एवं सिटी गेट स्टेशन (CGS) का कार्य प्रगति पर है और इसे नवंबर 2026 तक गैसीकृत करने का लक्ष्य है।
o बिना नेटवर्क वाले 9 जिले: अररिया, किशनगंज, अरवल, जहानाबाद, खगड़िया, नवादा, भागलपुर, सुपौल और गोपालगंज—इन जिलों में अवसंरचना निर्माण और तकनीकी व्यवहार्यता की समीक्षा की जा रही है।
o मुख्य सचिव ने इन 9 जिलों के जिलाधिकारियों को संबंधित तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विस्तृत कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

3. प्रशासनिक सहयोग और अंतर-विभागीय समन्वय:
o कम प्रगति वाले जिलों में D-PNG कनेक्शनों में तेजी लाने और अंतर-विभागीय समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया। o एनएचएआई (NHAI) और MoRTH से संबंधित अनुमति के मामलों तथा स्थानीय स्तर पर भूमि आवंटन/अतिक्रमण जैसी समस्याओं को शीघ्र सुलझाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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