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मेरे दिल की चाबी बस तुम्हारे पास है

मेरे दिल की चाबी बस तुम्हारे पास है

कुमार महेंद्र
तुम्हारी आँखों के दर्पण में,
मेरा अक्स मुस्कुराता है।
तुम्हारे सानिध्य में आकर,
मन पावन हो जाता है।
धड़कनों के इस सूने घर में,
तुम्हारे नाम का उजास है।
मेरे दिल की चाबी बस तुम्हारे पास है।।


तुम छुओ तो जैसे मरुभूमि में,
सावन की बौछार गिरे।
तुम हँसो तो जैसे रैन ढले,
नव प्रभात की किरणें झरें।
तुमसे महके मन का उपवन,
तुमसे जीवन मधुमास है।
मेरे दिल की चाबी बस तुम्हारे पास है।।


तुम्हारी परछाई बनकर मैं,
हर राह तुम्हारे संग चलूँ।
तुम्हारे प्रेम की छाँव तले,
हर पल हँसता-गाता ढलूँ।
तुमसे शुरू, तुम पर ही ठहरे,
मेरे जीवन की हर आस है।
मेरे दिल की चाबी बस तुम्हारे पास है।।


अनुराग का यह बंधन अटूट,
जन्मों का पावन नाता है।
तुम हो तो हर रंग सुहाना,
तुम बिन मन भरमाता है।
तुमसे ही जीवन हँसता है,
तुमसे ही हर साँस खास है।
मेरे दिल की चाबी बस तुम्हारे पास है।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)

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