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मित्रों का प्यार

मित्रों का प्यार

संजय जैन
जग हाँसाई देख लिया
अब प्रीत की बारी है।
दिल के अल्फाजों को
मित्रों से अब कहना है।।

उम्मीदें तो बहुत है
मित्रों से जो हमें।
देखना है कौन कितना
देता है साथ हमें।।

आज परीक्षा है कठिन
जिसे हमें पास करना है।
जिंदगी की ऊँचाइयों पर
मित्रों के संग पहुँचना है।।

वो भी दौर था जब
मित्रता की तूती बजती थी।
गाँव समाज में हमारी
चर्चा हुआ करती थी।।

उम्र के इस पड़ाव पर
आकर आज असहाय हूँ।
सहारे की मुझको अब
बहुत ही जरूरत है।।

देखना है कौन कितना
देता है अब साथ मेरा।
कल तक जिनको किया था
क्या आज सहारा देंगे मुझको।।

अच्छें सच्चें मित्रों का
अब पता चलेंगा।
मेरी दोस्ती का मुझे
अब हिसाब मिलेगा।।

आज मित्र दिवस की सभी को बहुत बहुत बधाई और शुभ कामनाएं।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई


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