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नयी कार्यसमिति के गठन हेतु अधिकृत किए गए डा अनिल सुलभ

नयी कार्यसमिति के गठन हेतु अधिकृत किए गए डा अनिल सुलभ

  • स्थायी समिति ने प्रस्ताव पारित कर किया अधिकृत, १ सितम्बर से हिन्दी-पखवारा एवं पुस्तक चौदस मेला
पटना, २७ अगस्त। आगामी कार्यकाल के लिए बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की कार्य समिति के गठन हेतु सम्मेलन के पुनर्निर्वाचित अध्यक्ष डा अनिल सुलभ को अधिकृत किया गया है। बुधवार को कदमकुआँ स्थित सम्मेलन-सभागार में सम्पन्न हुई, सम्मेलन की स्वामिनी समिति 'स्थायी समिति' की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सम्मेलन अध्यक्ष को यह अधिकार सौंपा गया।

सम्मेलन-अध्यक्ष के निर्वाचन के पश्चात नियमानुसार एक महीने के भीतर बुलायी गयी स्थायी समिति की प्रथम बैठक को संबोधित करते हुए, डा अनिल सुलभ ने उन्हें चौथी बार और निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित करने के लिए सभी सदस्यों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की तथा आश्वस्त किया कि वो दूने उत्साह से अपने कर्तव्यों और दायित्यों का निर्वहन करेंगे। उन्होंने विगत दशक में सम्मेलन द्वारा किए गए महत्त्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया तथा बताया कि इस अवधि में प्रतिवर्ष औसतन १२५ आयोजन किए गए, जो एक विश्व कीर्तिमान हो सकता है। उनके प्रथम बार अध्यक्ष बनने के पूर्व ४० वर्षों में केवल एक अधिवेशन हुए थे, उनके कार्यकाल के १४ वर्षों में ११ महाधिवेशन हुए। सम्मेलन-पत्रिका “सम्मेलन-साहित्य' का प्रकाशन हो रहा है। ५० से अधिक पुस्तकों के भी प्रकाशन हुए हैं। सम्मेलन की स्थापना के शती वर्ष में देश भर की १०० विदुषियों, १०० विद्वानों और १०० युवा साहित्यकारों को 'शताब्दी-सम्मान' के ऐतिहासिक अलंकरण से विभीषित किया गया। आज सम्मेलन अपने प्राचीन गौरव को पुनः प्राप्त करने में सफल हुआ है और इसकी धूम देश की सीमाओं को तोड़कर सात समुंदर पार तक पहुँची है।

डा सुलभ ने बताया कि 'हिन्दी-दिवस' के उपलक्ष्य में विगत वर्षों की भाँति, आगामी एक सितम्बर से हिन्दी-पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला का आयोजन किया जा रहा है। सभी १५ दिनों में विविध साहित्यिक आयोजन, विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिताएँ एवं कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी, इनमे काव्य-कार्यशाला तथा कथा-कार्यशाला सम्मिलित है। १४ सितम्बर को १४ हिन्दी-सेवियों का सम्मान तथा १५ सितम्बर को समापन समारोह संपन्न होगा, जिसमें प्रतियोगिताओं में विजयी विद्यार्थियों को पदक, प्रमाण-पत्र तथा पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा।

सभा में स्थायी समिति के सदस्य और पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो रास बिहारी सिंह, डा शंकर प्रसाद, डा कल्याणी कुसुम सिंह, डा कुमार अरुणोदय, प्रो बलिराज ठाकुर, डा नंद जी दूबे, महेश्वर ओझा 'महेश', उदय नारायण सिंह, डा अरुण कुमार निराला, डा कामेश्वर पंकज, डा आलोक कुमार, ब्रजेंद्र कुमार सिन्हा, देवेंद्र सिंह आज़ाद, डा विपिन दूबे, देशबंधु शर्मा, ईं आनन्द किशोर मिश्र, सुधीर मधुकर,रामेश्वरनाथ मिश्र 'विहान' समेत विभिन्न ज़िला सम्मेलनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने परामर्श दिए तथा सम्मेलन अध्यक्ष के प्रति विश्वास प्रकट किया। कुमार अनुपम ने प्रस्ताव प्रस्तुत किए। सभा का संचालन ईं अशोक कुमार ने किया।

बैठक में, डा ध्रुव कुमार, डा मनोज कुमार झा, डा पुष्पा जमुआर, विभारानी श्रीवास्तव, डा पूनम आनन्द, डा पूनम देवा, आराधना प्रसाद, कृष्ण रंजन सिंह, डा एम के मधु, शमा कौसर 'शमा', उमेश मिश्र, प्रो उषा सिंह, विद्यारानी चौधरी, मीरा प्रकाश, डा अर्चना त्रिपाठी, नमिता लोहानी, सरिता सिन्हा, सुनील कुमार, आशा रघुदेव, डा सुधा पाण्डेय, चंदा मिश्र, ज्योति मिश्रा, डा विनोद शर्मा, डा कौशलेन्द्र नारायण, बाँके बिहारी साव, सुजाता मिश्र, डा पल्लवी विश्वास, डा हरिमोहन सिंह, डा हरि नन्दन साह, शंभुनाथ पाण्डेय, जय प्रकाश पुजारी, निर्मला सिंह, डा इन्दु पाण्डेय, लोकनाथ तिवारी, डा अनिमेष, ब्रह्मानंद पाण्डेय, कमल नयन श्रीवास्तव, डा मनोज गोवर्धनपुरी, सुरेश कुमार चौबे, ज्ञानेश्वर शर्मा, डा रेणु मिश्र, डा रणजीत कुमार, डा नागेश्वर यादव, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, नीरव समदर्शी, डा प्रतिभा रानी, प्रेम लता सिंह, बुद्धदेव प्रसाद सिंह, आनन्द मोहन झा, डा जवाहर लाल, डा अजय कुमार मीत, शशि भूषण कुमार, सूर्य प्रकाश उपाध्याय आदि ११६ सदस्य उपस्थित थे।

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