Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

सुख दुःख जीवन के दो पहलू,

सुख दुःख जीवन के दो पहलू,

बचपन में यह जान सके ना।
सुख की अनुभूति में जीते हम,
दुःख का मतलब जान सके ना।


सुख की लहरों पर जीवन में,
विश्राम के पल कब आये?
एक पल के दुःख की अनुभूति,
आज तलक बिसरा पाये ना।


अवरोध मिले जब राहों में,
नये मार्ग खोजना सीखा।
उसमें जिस सुख को पाया,
उससे पहले पाये ना।


सुख का मीठा बहुत चखा था,
दुःख का स्वाद पता न था।
कभी कसैला खारा खाया,
खट्टा खा मीठे का मीठा पता न था।


बचपन ने हमको सिखलाया,
सीख समझकर आगे बढ़ना।
सुख दुःख में समभाव रहे हम,
सच्चाई का पता न था।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ