Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

जब सत्य चले निर्भय पथ पर, जीत बने सदा यशगान

जब सत्य चले निर्भय पथ पर, जीत बने सदा यशगान

कुमार महेंद्र
चाहे रातों के सन्नाटे,
या तूफानों का हो शोर।
सत्य-सूर्य बनकर चमके,
हर अंधियारे की भोर।
झूठ भले ही जाल बिछाए,
सत्य न छोड़े स्वाभिमान।
जब सत्य चले निर्भय पथ पर, 
जीत बने सदा यशगान।।


काँटों की परवाह न हो जब,
पथ में बिखरे अंगारे।
जो सच्चाई पर अडिग रहे,
झुकते उसके सम्मुख तारे।
डर को जो तज दे मन से,
पाता अमर-कीर्ति का वरदान।
जब सत्य चले निर्भय पथ पर, 
जीत बने सदा यशगान।।


इतिहास गवाही देता है,
जो डिगा नहीं अपने प्रण से।
सच्चा योद्धा विजयी होता,
अडिग रहा जो सत्य-वचन से।
उस धीर-वीर के चरणों में,
झुक जाता है सकल जहान।
जब सत्य चले निर्भय पथ पर, 
जीत बने सदा यशगान।।


मिट जाता है झूठ का साया,
जब न्याय-दीप का होता उदय।
पथ के सारे कंटक हटते,
रुख मोड़ती हर प्रलय।
सत्य सनातन अजर-अमर है,
यही है पुरुषार्थ की पहचान।
जब सत्य चले निर्भय पथ पर, 
जीत बने सदा यशगान।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ