युवा - उड़ान
अरुण दिव्यांशसंभल जाओ राष्ट्र के गद्दारों ,
सुन ले अब खोल के कान ।
पूरे न होंगे तेरे कोई मंसूबे ,
ले चुके अब ये युवा उड़ान ।।
बहुत ही की है गद्दारी तुमने ,
राष्ट्र को अब है सहन नहीं ।
बहुत सहा हमारा ये भारत ,
चिंतन अबतक गहन नहीं ।।
पक चुके हम देखते सुनते ,
पूरे न होंगे तेरे ये अरमान ।
संभल जाओ देश के गद्दारों ,
सुन ले अब खोल के कान ।।
भारत है भारतवासियों का ,
गद्दारों का है समावेश नहीं ।
अपनी दाल कोई पका ले ,
भारत कोई अवशेष नहीं ।।
निष्ठा से देशभक्ति है होता ,
सुन ले तू भी देकर ध्यान ।
संभल जाओ देश के गद्दारों ,
सुन ले अब खोल के कान ।।
तेरे जैसे बहुत हुए हैं चुगले ,
दे सकते न भारत को मात ।
जिनकी तू चरण है चूमता ,
सीमा पर भी सेना तैनात ।।
नहीं चलेगी तेरी ये धूर्तता ,
मिटा न सकोगे राष्ट्र मान ।
संभल जाओ देश के गद्दारों ,
सुन ले अब खोलके कान ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews