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*"सावन की फुहार"*

🌧️ *"सावन की फुहार"*🌧️

रचना - डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"

*अंतरा - १*
पिया चूड़ियाँ ले आई दs पटना के बजार से,
पिन्हा दs धीरे प्यार से ना। (२)
खुद से ले आव पिया, अपना हाथे पिन्नाव,
अपना हाथे पिन्नाव, अपना हाथे पिन्नाव।
छतिया से लगा लs तनी प्यार से,
बीते समइया इंतजार से ना।
पिया चूड़ियाँ ले आई दs पटना के बजार से...
पिन्हा दs धीरे प्यार से ना।
*अंतरा - २*
पिया सड़िया ले आई दs बनारस के बजार से,
गंगा जी के पार से ना। (२)
सड़िया पिन्हा दs पिया, माथे बिंदिया लगा दs,
बिंदिया लगा दs पिया, माथे बिंदिया लगा दs।
मथवा सहला दs तनी प्यार से,
ककहा के धार से ना।
पिया सड़िया ले आई दs बनारस के बजार से..
गंगा जी के पार से ना।


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