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श्री जीवन कल्याण स्तुति

श्री जीवन कल्याण स्तुति 

रचना - डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"
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ज्ञान मार्ग दिखलावनहारे,
भव सागर से तारनहारे।
सत्य सनातन राह दिखाओ,
मन मंदिर में वास कराओ॥ १ ॥


क्रोध मोह मद दूर भगाओ,
प्रेम प्रीति की धार बहाओ।
दुःख दरिद्र का नाश करो प्रभु,
सुख सम्पति का दान करो प्रभु॥ २ ॥


दीन दुखी के कष्ट हरो तुम,
मंगलमय सब काज करो तुम।
शांति अमन का दो वरदान,
हे जगदीश्वर चतुर सुजान॥ ३ ॥


अज्ञान हरो शिव राम प्रभु,
त्रिविध ताप निवारण हो विभु।
मन शांत करो, एकाग्र करो,
भव सागर पार उतारो प्रभु॥ ४ ॥


बुद्धि बल और ज्ञान का दान मिले,
हर लक्ष्य में पूर्ण मुकाम मिले।
भटकाव मिटे मन का सारा,
चमके भीतर सत्-चित्त तारा॥ ५ ॥


चिंता सब दूर निवारण हो,
सफलता का शुभ आगमन हो।
एकाग्रचित्त हो कर्म करें,
प्रभु चरणों में अनुराग भरें॥ ६ ॥


सच्ची सुख-शांति का वास मिले,
हृदय में अटूट विश्वास मिले।
हे देव! सदा कल्याण करो,अज्ञान का तीव्र विनाश करो॥ ७ ॥
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