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बिहार न्यायिक सेवा से बड़ी खबर: दो न्यायिक अधिकारियों के त्यागपत्र को राज्यपाल ने किए स्वीकार

बिहार न्यायिक सेवा से बड़ी खबर: दो न्यायिक अधिकारियों के त्यागपत्र को राज्यपाल ने किए स्वीकार

पटना। संवाददाता : रमेश कुमार

बिहार न्यायपालिका से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक खबर सामने आई है। पटना उच्च न्यायालय की अनुशंसा के आधार पर महामहिम राज्यपाल ने राज्य के दो वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के त्यागपत्र को विधिवत स्वीकार कर लिया है। बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के माध्यम से इस संबंध में आधिकारिक जानकारी दी गई है।

जारी अधिसूचना के अनुसार श्री आशुतोष कुमार सिंह, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, भोजपुर (आरा) तथा श्री मधुकर सिंह, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, पटना के त्यागपत्र को स्वीकार करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। दोनों अधिकारियों के संबंध में यह प्रशासनिक निर्णय पटना उच्च न्यायालय के महानिबंधक की अनुशंसा के आलोक में लिया गया है।

हाई कोर्ट की अनुशंसा के बाद हुआ निर्णय

बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में ज्ञापांक संख्या 7/स्था0-04-27/2026 सा०प्र० 15115 का उल्लेख किया गया है। यह निर्णय पटना उच्च न्यायालय के महानिबंधक द्वारा भेजे गए पत्रांक 71512 एवं 71514, दिनांक 07 अगस्त 2026 में की गई अनुशंसा के आधार पर लिया गया।

प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उच्च न्यायालय की अनुशंसा के बाद राज्य सरकार ने मामले को राज्यपाल के समक्ष रखा, जिसके पश्चात दोनों न्यायिक अधिकारियों के त्यागपत्र को स्वीकार किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई।

कौन हैं दोनों न्यायिक अधिकारी?

श्री आशुतोष कुमार सिंह भोजपुर जिले के आरा में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे। वहीं श्री मधुकर सिंह पटना में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के रूप में न्यायिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे।

दोनों पद न्यायिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के स्तर पर गंभीर आपराधिक मामलों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण न्यायिक मामलों की सुनवाई होती है। ऐसे में इन पदों पर कार्यरत अधिकारियों के सेवा संबंधी किसी भी बड़े प्रशासनिक निर्णय का न्यायिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से महत्व होता है।
बकाया राशि की वसूली की शर्त

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों अधिकारियों के त्यागपत्र को नियमानुसार यदि कोई बकाया राशि देय हो तो उसकी एकमुश्त वसूली के अधीन स्वीकार किया गया है।

इसका अर्थ है कि त्यागपत्र की स्वीकृति के साथ संबंधित अधिकारियों से सरकार अथवा संबंधित विभाग की कोई वैधानिक देनदारी या बकाया राशि यदि निर्धारित होती है, तो उसकी नियमानुसार वसूली की प्रक्रिया लागू रहेगी।
न्यायिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम

न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदस्थापन, स्थानांतरण, त्यागपत्र तथा सेवा संबंधी अन्य महत्वपूर्ण निर्णय निर्धारित संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं। बिहार में दो जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारियों के त्यागपत्र की स्वीकृति इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पटना उच्च न्यायालय की अनुशंसा और राज्यपाल की स्वीकृति के बाद बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी की गई है।

हालांकि, उपलब्ध अधिसूचना में दोनों अधिकारियों द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए उनके त्यागपत्र के पीछे किसी विशेष व्यक्तिगत, प्रशासनिक अथवा अन्य कारण को लेकर बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
आधिकारिक दस्तावेज ही आधार

न्यायिक सेवा से संबंधित मामलों में आधिकारिक अधिसूचना और सक्षम प्राधिकारी के आदेश को ही प्रमाणिक आधार माना जाता है। वर्तमान मामले में भी सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना में दर्ज तथ्यों के अनुसार दोनों न्यायिक अधिकारियों के त्यागपत्र को स्वीकार किया गया है।

यह घटनाक्रम बिहार की न्यायिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सेवा-संबंधी परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में संबंधित न्यायिक पदों पर होने वाली प्रशासनिक व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।

न्यायिक व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक निर्णय का प्रभाव केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह न्यायिक संस्थाओं के कामकाज और आम नागरिकों को मिलने वाली न्यायिक सेवाओं से भी जुड़ा होता है। ऐसे मामलों में आधिकारिक तथ्यों और प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर ही जानकारी को देखा जाना चाहिए।
संवाददाता रमेश कुमार की खबर
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