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हिंदू राष्ट्र विषयक संगोष्ठी में सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं जनजागरण का आह्वान

हिंदू राष्ट्र विषयक संगोष्ठी में सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं जनजागरण का आह्वान

मौरी-अंदुल (हावड़ा) में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं सामाजिक कार्यकर्ता हुए शामिल

हावड़ा (पश्चिम बंगाल)। मौरी-अंदुल, हावड़ा में हिंदू राष्ट्र विषयक एक संगोष्ठी का आयोजन पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन उनके कृपापात्र शिष्य एवं विश्व ब्राह्मण भूषण सम्मान से सम्मानित अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा के सानिध्य में हुआ, जिसमें क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं, समाजसेवियों एवं सनातन धर्म के अनुयायियों ने सहभागिता की।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा ने गोवर्धन मठ, पुरी द्वारा सनातन धर्म के मानबिंदुओं की रक्षा, सांस्कृतिक जागरण तथा राष्ट्रीय चेतना के लिए संचालित विभिन्न अभियानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समाज को सेवा, सत्संग, स्वाध्याय और संगोष्ठी जैसे माध्यमों से संगठित करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। उनके अनुसार इन्हीं चार आधारों पर समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिकता और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ किया जा सकता है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय सनातन परंपरा मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। उनके अनुसार सनातन वैदिक परंपरा समस्त विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर एक ही हैं, किंतु विभिन्न परंपराओं में उन्हें साकार, निराकार, सगुण अथवा निर्गुण स्वरूप में आराधना की जाती है।

अधिवक्ता झा ने सनातन व्यवस्था की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में चार वेद, चार आश्रम, चार वर्ण, चार धाम, चार युग तथा चार प्रमुख कुंभ स्थलों जैसी व्यवस्थाएँ समाज को संतुलित एवं व्यवस्थित जीवन प्रदान करने का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज अपने कर्तव्यों और धर्माचरण से विमुख होने लगा, तब भगवान आदि शंकराचार्य ने वैदिक सनातन परंपरा के पुनर्जागरण का कार्य किया और समूचे भारत में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक एकता का सूत्र स्थापित किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में पुरी गोवर्धन पीठ के 145वें शंकराचार्य भारत एवं नेपाल की सीमा से जुड़े क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क एवं जनजागरण यात्रा के माध्यम से लोगों को सनातन धर्म, राष्ट्रीय एकता तथा सांस्कृतिक गौरव के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह अभियान भव्य, सशक्त एवं सांस्कृतिक रूप से जागृत भारत के निर्माण के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विश्व में बढ़ती अनेक सामाजिक एवं नैतिक चुनौतियों के समाधान के लिए सनातन मूल्यों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से गोवर्धन मठ द्वारा संचालित जनजागरण अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने तथा सेवा एवं संगठन के कार्यों में सहयोग करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं एवं समर्थकों ने गोवर्धन मठ द्वारा संचालित धार्मिक एवं सामाजिक जागरण अभियान में सहयोग देने तथा अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का संकल्प व्यक्त किया।

इस संगोष्ठी को सफल बनाने में श्रीमती तंद्रानी मुखर्जी राय, सुकांतो राय, रूपम बनर्जी, पूजा शर्मा, अरुण शर्मा, संध्या शर्मा, शिखा शर्मा, राज शर्मा, आशीष चटर्जी, अरुण चटर्जी, अदिति शाह, अंजना राय, चंद्रानी राय, सुलेखा राय, पिंटू बनर्जी, लक्ष्मी नाथ, रीना बनर्जी, अंजलि चक्रवर्ती, रामसागर झा, समीरन मिश्रा, जावा राय सहित अनेक कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं की सक्रिय भूमिका रही।कार्यक्रम का समापन "हर-हर महादेव" के उद्घोष एवं सनातन धर्म की रक्षा एवं जनजागरण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
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