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हमारा भारत

हमारा भारत

संजय जैन

सुनो मेरे देशवासियों,
में हूँ एक साधारण इंसान,
मुझे भारत से प्यार है।
मुझ वतन से प्यार है।।

कभी नहीं दिया किसी को धोखा,
और न खाई झूठी कसमें,
जिन से की हमने दोस्ती,
दिया साथ सदा उनका।
चाहे वो कोई जाति धर्म का हो,
वो है हमारे देश की शान।
उन्हें कैसे दे हम धोखा
उन्हें कैसे दे हम धोखा।।

नहीं की कभी गद्दारी,
नहीं किया है भेदभाव।
नही देखा गलत नजरो से,
अपनी माता बहनों को।
चाहे वो हो अमीर या
हो चाहे वो हो गरीब,
हमारे देश की आन है,
हमारे देश की शान है।।

वतन से करते है हम बहुत प्यार,
हमारा देश बने गुलस्थान।
इसमें बसी है मेरी जान,
तो क्यो फैलाये इसमें नफरते हम।
यहां पर जन्मे हर मजहब के भगवान,
बसी है सब की देश में जान,
हमारा देश है बहुत महान।
हमे इससे बहुत प्यार है
हमे इससे बहुत प्यार है।।

जय जिनेन्द्र
संजय जैन "बीना" मुम्बई

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