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प्लास्टिक बंदी' कानून का कठोरता से पालन कर राष्ट्रध्वज का अपमान रोकें ! - हिन्दू जनजागृति समिति की प्रशासन से मांग

प्लास्टिक बंदी' कानून का कठोरता से पालन कर राष्ट्रध्वज का अपमान रोकें ! - हिन्दू जनजागृति समिति की प्रशासन से मांग

वाराणसी - 15 अगस्त के राष्ट्रीय पर्व पर देशभक्ति की भावना से राष्ट्रध्वज बड़े अभिमान के साथ फहराए जाते हैं; परंतु दुर्भाग्य से वही राष्ट्रध्वज उसी दिन सड़कों पर, कूड़ेदान में या नालियों में फटी अवस्था में पड़े मिलते हैं। विशेषकर प्लास्टिक के ध्वज जैविक रूप से विघटनशील न होने के कारण यह अपमान कई दिनों तक होता रहता है। इसके अतिरिक्त, 'टी-शर्ट', मास्क और अन्य परिधानों के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर राष्ट्रध्वज का अपमान हो रहा है। इस अपमान को रोकने के लिए उच्च न्यायालय के आदेशों और उपलब्ध कानूनों का प्रशासन कड़ाई से पालन करे, यह मांग हिन्दू जनजागृति समिति ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन वाराणसी श्री पंकज कुमार, माननीय उप जिलाधिकारी पिंडरा वाराणसी श्री कुंदन राज कपूर व सहायक पुलिस आयुक्त श्री प्रशांत सिंह जी को ज्ञापन दिया । इस समय ज्ञापन देते समय ज्ञानवापी मुख्य याचिकाकर्ता डॉ सोहनलाल आर्य, ज्ञानवापी अधिवक्ता दीपक सिंह, अधिवक्ता संजीवन यादव, अधिवक्ता अरुण कुमार मौर्य, अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश राय, अधिवक्ता आनन्द कुमार राय, अधिवक्ता अवनीश कुमार तिवारी, संजय सिंह, प्रमोद गुप्ता,अधिवक्ता उमेश कुमार सिंह, अधिवक्ता श्याम शंकर सिंह, अधिवक्ता संतोष सिंह, अधिवक्ता अतुल सिंह, अधिवक्ता बृजेश मिश्रा, त्रिशांत सिंह, रविंद्र कुमार पटेल प्रधान, आदर्श पटेल और प्रमेश विश्वकर्मा उपस्थित थे ।
राष्ट्रध्वज के इस अपमान को रोकने के लिए हिन्दू जनजागृति समिति ने मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (क्र. 103/2011) दायर की थी। इसकी सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने प्लास्टिक के राष्ट्रध्वजों द्वारा होने वाला अपमान रोकने के लिए सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। तदनुसार, केंद्रीय एवं राज्य के गृह तथा शिक्षा विभागों ने परिपत्र जारी किए हैं। वर्तमान में देशभर में 'सिंगल यूज़ प्लास्टिक' पर पूर्ण प्रतिबंध होने के कारण प्लास्टिक ध्वजों का उत्पादन और बिक्री करना अब दोहरा अपराध है। इसके साथ ही, 'भारतीय ध्वज संहिता 2002', 'प्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम 1950' (धारा 2 और 5) तथा 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971' (धारा 2) के अंतर्गत राष्ट्रध्वज का अपमान करना एक दंडनीय अपराध है। प्रशासन को इन कानूनों का प्रभावी रूप से क्रियान्वयन करना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि 'राष्ट्रध्वज का अपमान रोकने के लिए कृति समिति स्थापित की जाए और जनजागृति हेतु उसमें सामाजिक संस्थाओं को सम्मिलित किया जाए।' इसी संदर्भ में हिन्दू जनजागृति समिति पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से 'राष्ट्रध्वज का सम्मान रखें!' यह राष्ट्रव्यापी अभियान चला रही है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए व्याख्यान और प्रश्नमंजूषा आयोजित करना, हस्तपत्रक बांटना, भित्तिपत्रक लगाना, स्थानीय केबल चैनल्स और 'सोशल मीडिया' के माध्यम से जनजागृति करना, तथा सड़कों पर गिरे राष्ट्रध्वजों को एकत्रित कर उनका सम्मानपूर्वक निस्तारण (Disposal) करना आदि कार्य निरंतर किए जाते हैं, यह भी समिति ने इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से स्पष्ट किया है।

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