Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

अन्तिम अभिलाषा

अन्तिम अभिलाषा

स्वरचना - डॉ अनमोल कुमार, मोकामा, पटना ( बिहार)

मरने के बाद भी काम आ जाऊं,
ये मेरी आखिरी अभिलाषा है।
राख बनकर बिखरने से पहले,
किसी के काम आ जाना चाहता हूं।

मेरी आंखें किसी अंधे को रौशनी दें,
मेरा दिल किसी की धड़कन बन जाए।
मेरे हाथ किसी की मदद करें,
मेरे अंग किसी का जीवन बचाएं।

न मेरा नाम, न मेरा चेहरा,
बस मेरी देह से कोई जी जाए।
यही सबसे बड़ा दान है,
यही सच्ची विदाई है।

जीवन में इंसान बनकर जिया,
मरकर भी इंसानियत निभा जाऊं। 
देहदान - जीवन के बाद भी जीवन

हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ