सावन चतुर्थ सोमवार, शिव स्नेहिल कृपा-वृष्टि अपार
कुमार महेंद्रशुभ-मंगल सावन मनोरम,
शिव आराधन चरम अनंत।
भू-पटल पर हरित नव यौवन,
कण-कण गाता शिव का छंद।
प्रबल धर्म-आस्था के संग,
प्रकृति आँचल आनंद बहार।
सावन चतुर्थ सोमवार, शिव स्नेहिल कृपा-वृष्टि अपार।।
हर पग बढ़ता शिवालय की ओर,
हर अधर गूँजे भोले का नाम।
घंटा-घड़ियालों की ध्वनि में,
मुखरित होता शिव का धाम।
दूध-दही, मधु, घृत संग जल,
पंचामृत से अभिषेक साकार।
सावन चतुर्थ सोमवार, शिव स्नेहिल कृपा-वृष्टि अपार।।
विधिवत पूजन, मंत्रोच्चार,
शिव-चरणों में अर्पित ध्यान।
शिव-चालीसा के पावन स्वर से,
पुलकित होता अंतर्मन-प्राण।
‘ॐ नमः शिवाय’ के जप से,
खुले भीतर ज्ञान-प्रकाश द्वार।
सावन चतुर्थ सोमवार, शिव स्नेहिल कृपा-वृष्टि अपार।।
श्रावण मास का अंतिम सोमवार,
भक्ति-आस्था में रंगा संसार।
पग-पग पावन अनुष्ठान सजे,
गूँजे हर ओर हर-हर जयकार।
संकल्पों को सिद्धि मिले,
महादेव महिमा अपरंपार।
सावन चतुर्थ सोमवार, शिव स्नेहिल कृपा-वृष्टि अपार।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews