विचारों का श्रृंगार, ख़ुद के लिए!
रचना - डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"करती रहती हैं श्रृंगार ख़ुद के लिए,
फिर क्यों इतना इकरार ख़ुद के लिए?
आईना भी देखकर मुस्काए अगर,
समझिए कोई है तैयार ख़ुद के लिए!
कपड़े पहनें बार - बार बदलकर नए,
जाएँ सज-धजकर बाज़ार ख़ुद के लिए।
हमने पूछा, इतनी तैयारी किसलिए?
बोलीं अरे! रोज है त्योहार ख़ुद के लिए!
कहती हैं, मैं क्यों मायूस रहूँ,
खुश हूँ मैं हर बार ख़ुद के लिए।
'राकेश' ने कहा, ये बात मान ली पर,
बचाकर रखिए थोड़ा प्यार ख़ुद के लिए!
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews