एक सितंबर की ‘बदलाव जरूरी है’ दिल्ली रैली में बिहार से एक लाख लोगों के कूच का दावा

पटना, 18 अगस्त 2026। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ 1 सितंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘बदलाव जरूरी है’ रैली आयोजित करने का ऐलान किया है। पार्टी का दावा है कि इस रैली में बिहार से करीब एक लाख लोग भाग लेंगे। रैली को लेकर बिहार में पार्टी की ओर से व्यापक जनसंपर्क और संगठनात्मक अभियान चलाया जा रहा है।
रैली की तैयारियों की समीक्षा के लिए 17 अगस्त को पटना में भाकपा बिहार राज्य परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में दिल्ली रैली की तैयारियों, बिहार से अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
बैठक के फैसलों की जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. गिरीशचंद्र शर्मा, राष्ट्रीय सचिव संजय कुमार तथा बिहार राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में दी। इस अवसर पर राज्य सचिव मंडल के सदस्य का. सुरेन्द्र सौरभ और का. प्रमोद प्रभाकर भी मौजूद रहे।
38 जिलों में पदयात्रा, 25 अगस्त तक अभियान जारी रखने का निर्णय
भाकपा नेताओं ने बताया कि 6 से 15 अगस्त 2026 तक बिहार के सभी 38 जिलों में राष्ट्रव्यापी पदयात्रा कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी के अनुसार, इन पदयात्राओं के दौरान महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, श्रमिक अधिकार, शिक्षा, लोकतंत्र और संविधान से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच उठाया गया।
पार्टी ने पदयात्रा अभियान के प्रभाव को देखते हुए इसे 25 अगस्त 2026 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। भाकपा नेताओं का कहना है कि गांवों और शहरों में ‘बदलाव जरूरी है’ तथा ‘1 सितंबर दिल्ली चलो’ का संदेश लगातार पहुंचाया जा रहा है।
मोदी सरकार पर जनविरोधी नीतियों का आरोप
भाकपा नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में देश के सामने बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक असमानता और सामाजिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ी हैं।
पार्टी का आरोप है कि चुनावों के दौरान भाजपा की ओर से विकास, रोजगार, समृद्धि और सुशासन के बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन आम लोगों को अपेक्षित राहत नहीं मिली। भाकपा नेताओं ने कहा कि छात्र, नौजवान, किसान, मजदूर, महिलाएं, दलित और आदिवासी वर्ग सरकार की नीतियों से परेशान हैं।
पार्टी ने केंद्र की आर्थिक नीतियों को कॉरपोरेट समर्थक बताते हुए कहा कि महंगाई और रोजगार के संकट का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है। वहीं, शिक्षा नीति को लेकर भी छात्र और युवा वर्ग में असंतोष होने का दावा किया गया।
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का लगाया आरोप
भाकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नीतियों और उपलब्धियों पर उठ रहे सवालों का जवाब देने के बजाय बार-बार सांप्रदायिक तथा भावनात्मक मुद्दों को सामने लाती है। पार्टी का कहना है कि इससे जनता के वास्तविक मुद्दे—रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा—पीछे छूट जाते हैं।
भाकपा ने भाजपा और आरएसएस पर समाज में विभाजन पैदा करने वाली राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने के लिए लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा जरूरी है।
संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भी सवाल
पार्टी नेताओं ने विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं और केंद्रीय एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इन संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल किए जाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्याय व्यवस्था कमजोर हो रही है।
भाकपा ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है। पार्टी नेताओं ने वयस्क मताधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को अपनी राजनीतिक मुहिम का प्रमुख मुद्दा बताया।
किसान और मजदूरों के मुद्दे भी होंगे प्रमुख
भाकपा नेताओं ने कृषि क्षेत्र में बढ़ते संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि खेती-किसानी पर कॉरपोरेट प्रभाव बढ़ने से छोटे और मध्यम किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। पार्टी ने किसानों की आय, कृषि लागत और बाजार से जुड़े सवालों को रैली में प्रमुखता से उठाने की बात कही।
इसी तरह श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की गई। पार्टी का कहना है कि मजदूरों के हितों की रक्षा तथा रोजगार के अवसरों का विस्तार मौजूदा समय की बड़ी जरूरत है।
महिला अधिकार और आरक्षण का मुद्दा भी उठेगा
भाकपा ने महिला अधिकारों को भी अपने अभियान का प्रमुख विषय बनाया है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने में देरी से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का सवाल पीछे चला गया है।
पार्टी का कहना है कि महिलाओं की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक भागीदारी बढ़ाए बिना समानता आधारित लोकतांत्रिक समाज का निर्माण संभव नहीं है।
प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर भी निशाना
भाकपा नेताओं ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने असहमति रखने वालों और सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों के प्रति कठोर राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया।
पार्टी नेताओं ने प्रधानमंत्री द्वारा ‘नक्सल’ से जुड़े संदर्भों को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि सरकार को असहमति तथा आलोचना को लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा मानना चाहिए।
भाकपा नेताओं ने अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया और भाजपा पर धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में पार्टी ने अपने राजनीतिक दृष्टिकोण के आधार पर सवाल उठाए हैं।
‘बदलाव जरूरी है’ को बनाया अभियान का मुख्य नारा
भाकपा के अनुसार, 1 सितंबर की दिल्ली रैली केवल पार्टी का कार्यक्रम नहीं बल्कि देश में जन मुद्दों को लेकर व्यापक राजनीतिक आवाज बुलंद करने का प्रयास है। पार्टी का दावा है कि देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचेंगे।
बिहार में रैली को सफल बनाने के लिए जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। पदयात्राओं, जनसंपर्क अभियानों और बैठकों के माध्यम से लोगों को दिल्ली पहुंचने के लिए लामबंद किया जा रहा है।
भाकपा नेताओं ने कहा कि ‘बदलाव जरूरी है’ और ‘1 सितंबर दिल्ली चलो’ का संदेश बिहार के गांवों और शहरों तक पहुंचाया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली में बिहार की भागीदारी ऐतिहासिक होगी और राज्य से करीब एक लाख लोग इसमें शामिल होंगे।आगामी दिनों में बिहार में रैली की तैयारियां और तेज होने की संभावना है। भाकपा का कहना है कि बेरोजगारी, महंगाई, किसान-मजदूरों की समस्याओं, शिक्षा, महिला अधिकार, संविधान और लोकतंत्र जैसे मुद्दों को लेकर वह अपना अभियान लगातार जारी रखेगी।
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