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अगस्त 2026 के कुछ महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार

अगस्त 2026 के कुछ महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार

हर हर महादेव!

मैं आप सबको और आप सबके हृदय में विराजमान ईश्वर को प्रणाम करता हूं और धन्यवाद करता हूं। अंग्रेजी कैलेंडर के अगस्त महीने में भारतीय सनातन पंचांग के अनुसार श्रावण और भाद्रपद का मिला-जुला महीना होता है। श्रावण मास की अधिपति देवाधिदेव महादेव होते हैं। श्रावण महीने में समस्त संसार में भगवान भोलेनाथ की धूमधाम से पूजा अर्चना की जाती है। पूरे वातावरण में *ऊं नमः शिवाय* और *बोल बम* का नारा गूंजता है। शिव मंदिर में कांवरियों का तांता लगा रहता है। मंदिरों से लेकर घरों तक रुद्राभिषेक का कार्यक्रम चलता है। चारों तरफ हरियाली खुशहाली देखने को मिलती है। जबकि भाद्रपद का महीना भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में विशेष रूप से जाना जाता है। भाद्रपद के महीने में भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। 10 दिनों के श्री गणपति उत्सव को श्री गणेश दशहरा के नाम से भी जाना जाता है। भारतवर्ष में महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के साथ-साथ पूरे देश में भगवान श्री गणेश की बड़ी श्रद्धा भक्ति के साथ विशेष पूजा अर्चना की जाती है। श्रावण मास और भाद्रपद मास के अधिपति देवी देवताओं को नमन करते हुए आइए हम चर्चा करते हैं अगस्त 2026 के महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों के बारे में।

अंग्रेजी तारीख के अनुसार 30 जुलाई से 12 अगस्त तक श्रावण कृष्ण पक्ष होगा। त्रयोदशी तिथि का क्षय हो जाने के कारण यह पक्ष 14 दिनों का ही है।

जबकि 13 अगस्त से 28 अगस्त तक श्रावण शुक्ल पक्ष होगा। द्वादशी तिथि की वृद्धि हो जाने के कारण यह पक्ष 16 दिनों का हो गया है।

29 अगस्त से भाद्रपद मास प्रारंभ होगा।

1 अगस्त शनिवार को जया पार्वती व्रत की समाप्ति होगी।

2 अगस्त रविवार को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत होगा। आज मित्रता दिवस है।

3 अगस्त सोमवार को श्रावण मास का पहला सोमवार व्रत होगा।

9 अगस्त रविवार को कामदा एकादशी व्रत और वैष्णव दोनों के लिए सर्वमान्य होगा। इसे कामिका एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

10 अगस्त सोमवार को सोम प्रदोष व्रत होगा। आज श्रावण मास का दूसरा सोमवार व्रत होगा।

11 अगस्त मंगलवार को मासिक शिवरात्रि व्रत होगा।

12 अगस्त बुधवार को स्नान दान श्राद्ध की अमावस्या होगी। इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। आज स्वामी अखंडानंद जी की जयंती है।

13 अगस्त गुरुवार को इष्टि है। आज के दिन अपने घर के मंदिर में रखे देवी देवताओं को पकवान का भोग लगाया जाता है।

14 अगस्त शुक्रवार को चंद्र दर्शन होगा। आज धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी की जयंती है।

15 अगस्त शनिवार को भारतीय स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। आज के ही दिन सन 1947 में भारतवर्ष को अंग्रेजों के गुलामी से मुक्ति मिली थी। हमारा प्यारा भारतवर्ष आजाद हुआ था। आज उसी आजादी का महापर्व है। घर-घर में तिरंगा झंडा लहराएगा और भारत माता की जय के नारे गूंजेंगे।

आज हरियाली तीज है। इसे कजरी तीज अथवा श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता है।

16 अगस्त रविवार को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत होगा।

17 अगस्त सोमवार को श्री नाग पंचमी है। आज श्रावण मास का तीसरा सोमवार व्रत होगा।

18 अगस्त मंगलवार को कल्कि जयंती मनाई जाएगी।

19 अगस्त बुधवार को गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनाई जाएगी। श्री रामचरितमानस एवं श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती पूरे संसार में धूमधाम से मनाई जाएगी।

20 अगस्त गुरुवार को श्री दुर्गा अष्टमी का व्रत होगा।

23 अगस्त रविवार को पुत्रदा एकादशी का व्रत गृहस्थ और वैष्णव दोनों के लिए सर्वमान्य होगा।

आज से झूलन यात्रा आरंभ होगी।

24 अगस्त सोमवार को श्रावण महीने का चौथा और अंतिम सोमवार व्रत होगा।

25 अगस्त मंगलवार को भौम प्रदोष व्रत होगा।

27 अगस्त गुरुवार को व्रत की पूर्णिमा होगी। आज भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार की जयंती मनाई जाएगी।

28 अगस्त शुक्रवार को स्नान दान की पूर्णिमा होगी।

आज भाई बहनों के प्रेम का प्रतीक त्योहार रक्षाबंधन अर्थात राखी का त्यौहार मनाया जाएगा। उदया तिथि की पूर्णिमा के कारण रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त पूरे दिन भर बना रहेगा। राहुकाल का त्याग करते हुए रक्षाबंधन का कार्यक्रम पूरे दिन में कभी भी किया जा सकता है। हालांकि आज पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 तक ही है। किंतु उदया तिथि की मान्यता के अनुसार पूरे दिन पूर्णिमा की मान्यता होगी। आज श्रावणी उपाकर्म भी है। आज संस्कृत दिवस भी है। आज झूलन यात्रा समाप्त हो जाएगी।

सुबह 9:48 के बाद प्रतिपदा तिथि लगने के कारण आज इष्टि भी मनाई जाएगी।

29 अगस्त शनिवार से भाद्रपद मास प्रारंभ होगा।

30 अगस्त रविवार को भीमचंदी विंध्याचली देवी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। आज कजरी का रतजग्गा भी मनाया जाएगा।

31 अगस्त सोमवार को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत होगा। इसे बहुला चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। कज्जली का प्रसिद्ध पर्व आज ही मनाया जाएगा।

विशेष टिप्पणी:

3 अगस्त सोमवार की रात 11:25 पर भगवान सूर्य श्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसमें बदल तो खूब आएंगे। किंतु अनुपात के अनुसार वर्षा कम होगी।

10 अगस्त के आसपास बहुत अच्छी वृष्टि(मूसलाधार बारिश) होने के योग बन रहे हैं। अलसी, तिल, गुड़ एवं मादक द्रव्यों में, नशीली पदार्थों के मूल्यों में तेजी आएगी। शेयर बाजार में उछाल देखने को मिलेगा।

17 अगस्त सोमवार को रात 10:21 पर भगवान सूर्य मघा नक्षत्र एवं सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। जिसे सिंह संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। संक्रांति लगते ही वर्षा आरंभ हो जाएगी। कुल मिलाकर 13 अगस्त से 28 अगस्त तक सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना बन रही है।

विशेष सूचना:

28 अगस्त 2026 श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णिमा शुक्रवार को खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। यह चंद्र ग्रहण अंटार्कटिका, अफ्रीका, एशिया, यूरोप, हिंद महासागर, अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। भारतीय मानक समय के अनुसार ग्रहण का स्पर्श दिन में 8:04 पर होगा तथा मोक्ष दिन में 11:22 पर हो जाएगा। यह चंद्र ग्रहण भी भारत भूमि में दिखाई नहीं देगा। इसीलिए इसका कोई भी धर्म शास्त्रीय महत्व भारतवर्ष में नहीं होगा।

नियम के अनुसार सूर्य ग्रहण दिन में होता है और चंद्र ग्रहण रात में होता है। जिस समय चंद्र ग्रहण लगेगा उस समय हमारे भारतवर्ष में दिन का समय होगा। इसीलिए इस ग्रहण की मान्यता भारतवर्ष में नहीं होगी।

पौराणिक कथा

माँ पार्वती और माँ गंगा के बीच विवाद?

देवाधिदेव महादेव को जगतपिता भी कहा जाता है, क्योंकि उनका विवाह इस संसार की शक्ति, मां पार्वती से हुआ था। शिव और शक्ति के संयोजन से ही हमारी यह प्रकृति चल रही है। वे दोनों, एक दूसरे के अर्धांग हैं और एक दूसरे के बिना अपूर्ण भी हैं। जहां, एक तरफ भगवान शिव, अनादि के सृजनकर्ता हैं, वहीं, माता पार्वती, प्रकृति का मूल स्वरूप हैं।

माता पार्वती, राजा हिमावन की पुत्री हैं, जिसके अनुसार, उन्हें, शैलपुत्री भी कहा जाता है। सनातन धर्म के अनुसार, देवी गंगा का अवतरण भी हिमालय से हुआ था, जिसके अनुसार, वे, माता पार्वती की बहन लगती हैं। एक कथा के अनुसार, एक बार, इन दोनों बहनों में शिव जी को लेकर विवाद हो गया, जो संभाले नहीं संभल रहा था। आइए जानतें हैं माता पार्वती और गंगा जी के विवाद की रोचक कथा के बारे में...

शिव शक्ति

एक बार, शिव जी, अपने परम निवास, कैलाश पर्वत पर ध्यानस्थ बैठे थे, जहां उनके साथ में ही माता पार्वती भी ध्यान में मग्न थीं। शिव और शक्ति का यह सुदंर स्वरूप, एक साथ बहुत ही मनमोहक लग रहा था। ध्यानमग्न, माता पार्वती और अपने प्रभु शिव जी की शोभा को उनके परम भक्त नंदी जी निहार रहे थे। दोनों का यह सुंदर स्वरूप देख, नंदी जी के नेत्रों से खुशी के आंसू बहने लगे। अपने भक्त की आंखों से बहते अश्रुओं का भान जैसे ही महादेव को हुआ, उन्होंने अपने नेत्र खोले।

महादेव के समक्ष, साक्षात थीं गंगा जी

महादेव ने जैसे ही भक्त की चिंता में नेत्र खोले, उन्होंने देखा, सामने गंगा जी हाथ जोड़े खड़ी थीं। गंगा जी को देख, महादेव हैरान होते हुए बोले, “देवी गंगे, आप?!” तो उत्तर में मां गंगा बोलीं, “हे आदिपुरुष! आपके इस रूप को देखकर, मैं आप पर मोहित हो गई हूं। कृपा कर, मुझे पत्नी रूप में स्वीकार करें।”

मां पार्वती का क्रोध

जैसे ही मां गंगा के स्वर, माता पार्वती के कानों में पड़े, वे हैरान हो गईं। मां गंगा की यह बात सुनकर उनके नेत्र लाल हो गए और क्रोधवश, वे बोल पड़ीं, “देवी गंगा, सीमा ना लांघिए! मत भूलिए महादेव हमारे पति हैं!” यह सुनकर ठिठोली करते हुए मां गंगा बोलीं, “अरे बहन, क्या फर्क पड़ता है? वैसे भी भले ही तुम महादेव की पत्नी हो फिर भी देवाधिदेव महादेव, अपने शीश पर तो मुझे ही धारण करते हैं। जहां महादेव के साथ तुम नहीं जा सकतीं, मैं तो वहां भी पहुंच ही जाती हूं!”

गंगा की यह बात सुनते ही माता पार्वती के क्रोध का ठिकाना ना रहा, उनका क्रोध से मुख भयंकर हो गया।

मां पार्वती का गंगा को श्राप

मां गंगा के वचन सुनकर, मां पार्वती, उन्हें श्राप देते हुए बोलीं, “गंगे! तुमने मेरी बहन होने की सीमा लांघ दी है। मैं तुम्हे श्राप देती हूं कि तुम में मृत देह बहेंगी! जग जन के पाप धोते-धोते, तुम मैली हो जाओगी! तुम्हारा यह अहम टूटेगा और तुम्हारा रंग भी काला पड़ जाएगा!”



गंगा की याचना

मां गंगा, यह सुनते ही महादेव और मां पार्वती के चरणों में गिर गईं। वे, अपनी भूल का पश्चातापकर, मां पार्वती और महादेव से क्षमा याचना करने लगीं। तब महादेव ने उनसे कहा कि “हे गंगे! यह श्राप तो अब फलित होकर रहेगा परन्तु आपके पश्चाताप से प्रसन्न होकर हम आपको इस श्राप से मुक्ति देते हैं।

हे गंगे! आप जन मानस के पापों से दूषित होंगी परन्तु संतजन के स्नान से आपकी शुद्धि, आपको वापस प्राप्त होगी।” इस प्रकार, भगवान शिव ने मां गंगा को प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया। इसके बाद से ही गंगा में स्नान से पाप धुलने लगे। तब से ही लोग, गंगा में स्नान करने के लिए दूर-दूर से आते हैं और भूल-चूक में हुए पापों से मुक्ति पाते हैं।

इति शुभमस्तु।

ज्ञानवर्धकजानकारी

गुरु पुष्य योग पर सोना खरीदने जैसा शुभ फल प्राप्त करने का विशेष प्रयोग*

गुरु पुष्य योग में सोना खरीदना शुभ माना जाता है। किंतु आजकल जिस तरह से सोने का मूल्य बढ़ता जा रहा है उससे हर बार गुरु पुष्य पर सोना खरीदना थोड़ा मुश्किल होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में जब-जब गुरु पुष्य योग लगे, तब तब कुछ ऐसे प्रयोग हैं जिन्हें करके गुरु पुष्य योग का पूर्ण लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे सोना खरीदने जैसा ही शुभ फल प्राप्त होता है।

गुरु पुष्य योग में गुरु की होरा और गुरु की उपहोरा में उत्तर की तरफ मुंह करके अपने पहने हुए सोने के आभूषणों को उतार कर उसे गंगाजल से धोकर अपनी बाई हथेली पर रखकर दाहिने हाथ की हथेली से ढंक कर उत्तर की तरफ मुंह करके *ग्लौं* बीज मंत्र का जाप 11 बार मन ही मन करना है। बिना जीभ और होंठों को हिलाए, मुंह बंद करके मन ही मन 11 बार *ग्लौं* बीज मंत्र का जाप करके उसे वापस धारण कर लेना चाहिए। चमत्कारिक लाभ होता है। *ग्लौं*बीज मंत्र भगवान श्री गणेश जी का बीज मंत्र है। भगवान श्री गणेश की विशेष कृपा से अपार धन की प्राप्ति होती है।

सोने के आभूषणों को (जो पुराने आभूषण घर में पड़े हैं उन्हें) गुरु पुष्य योग में पीतल की छोटी सी कलश में गंगाजल भरकर उसमें रख देना चाहिए। ऊपर से एक चुटकी हल्दी डाल दें और *ऊं नमो भगवते वासुदेवाय* मंत्र की 11 माला जाप कर लें और पूरे दिन रात भगवान के मंदिर में या तो भगवान विष्णु के सामने अथवा श्री गणेश लक्ष्मी जी के सामने उसे रहने दें। अगली सुबह उसे अच्छी तरह से धो पोंछकर पीले कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से बिल्कुल नया सोना खरीदने जैसा ही शुभ फल प्राप्त होता है।

इति शुभमस्तु। लेखक: रवि शेखर सिन्हा और आचार्य मनमोहन। ज्योतिष मार्तंड एवं जन्म कुंडली विशेषज्ञ।
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