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दादाजी बूंट लादने गये

दादाजी बूंट लादने गये 

जय प्रकाश कुमार
बच्चों का दिल सरल सीधा होता है। उनका दिल दिमाग किसी अप्रिय घटना की खबर को सहन नहीं कर पाता है। गांव देहात में लोग बच्चों से किसी बड़ी घटना को भी कितनी सहजता से प्रचलित मुहावरों के रूप में बता देते हैं कि उन्हें परिवार की बात भी बता दी जाए और उनके दिल दिमाग पर कोई आघात भी न लगे। ऐसा प्रकरण मेरे खुद के जीवन में भी घटा है।
उन दिनों मैं पांचवीं कक्षा का छात्र था और अपने गाँव के ही अपर प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। मैं एक संयुक्त परिवार में रहता था जिसके मुखिया मेरे ९० वर्षीय दादाजी थे। उस उम्र में भी वे परिवार का देखभाल करते थे और सबकी सभी जरूरतों को पूरा करते थे। हम बच्चों को पढ़ना और खेलना छोड़ और कोई जबाबदेही नहीं था। दादाजी का खानपान ठीक था जिसके वजह से वे स्वस्थ थे। दादाजी परिवार के हम बच्चों को खुब प्यार करते थे।
एक दिन मैं सुबह स्कूल गया हुआ था। दोपहर में क्लास खत्म होने पर हम सभी बच्चे स्कूल के हाते में खेल रहे थे। तभी उस दिन मेरे दादाजी के अकस्मात देहांत हो जाने की सूचना गाँव के हमारे पड़ोसी परिवार के किसी आदमी ने आकर स्कूल के हेडमास्टर साहब को दिया था और मुझे घर भेज देने को कह कर चला गया था। हेडमास्टर साहब ने मुझे बुलाया और बड़े शांतभाव और प्रेम से कहा कि तुम अभी अपने घर चले जाओ। तुम्हारे घर से तुम्हारा बुलावा आया है, क्योंकि तुम्हारे दादाजी बूंट लादने चले गए।
मेरे बचपन का दिमाग दादाजी के बूंट लादने जाने की खबर सुनकर खुशी से झूमने लगा कि अब हम लोगों को खुब बूंट (चना) का भूंजा सत्तू और घुघनी मनचाहे खाने को मिलेगा। मैंने अपना झोला बस्ता उठाया और खुशी से उछलता हुआ घर पहुँचा। घर आकर देखता हूँ कि दादाजी को बिचाली के बिस्तर पर जमीन पर लिटाया हुआ है और उनके शरीर पर एक सफेद कपड़ा ओढ़ाया हुआ है। उनके शरीर के पास बैठकर परिवार के लोग रो रहे हैं और मातम मना रहे हैं। गाँव के लोगों की भी भीड़ लगी हुई है और सभी लोग दुखी हैं।
मैं आकर अपनी बिलखती हुई दादी के गोद में बैठ गया और पूछा कि आप सभी लोग क्यों रो रहे हैं और दादाजी को क्यों नीचे जमीन पर लिटाया गया है। उनका सोने वाला खाट क्या टूट गया है। मुझे तो हेडमास्टर साहब ने बताया कि तुम्हारे दादाजी बूंट लादने गए हैं। तब दादी ने बताया कि तुम्हारे दादाजी हम सभी लोगों को छोड़कर स्वर्ग सिधार गए। अब वे कभी नहीं लौट कर आयेंगे। अब उनके अंतिम यात्रा की तैयारी चल रही है, इसलिए तुमको उनके पार्थिव शरीर के दर्शन करने के लिए स्कूल से बुलाया गया।
दादाजी के मरने की खबर सुनकर और यह जानकर कि दादाजी अब कभी लौट कर नहीं आयेंगे मैं बेतहाशा फुट फुट कर रोने लगा। उस दिन पहले पहले मैंने यह जाना कि किसी के मर जाने पर गाँव देहात में लोग ऐसा कहते हैं कि अमुक आदमी बूंट लादने गया, ताकि यह बुरी खबर सुनकर किसी बच्चे के दिल दिमाग पर हठात सदमा नहीं पहुंचे।

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