रास्ता खोजना है
संजय जैनजिंदगी की कहानी अब
किस ओर घूमेंगी।
क्योंकि चौराहें पे आकर
कदम जो रुक गये है।
कहाँ जाना कहाँ से आना
कुछ भी पता नही है।
ऐसा लग रहा है कि
जिंदगी ठहर सी गई है।।
चारों तरफ घोर अंधेरा है
कुछ सूरागों से उजेला है।
इसलिए जिंदगी का इंतिहान
अभी आना बाकी है।
पता नही जिंदगी को
किस दिशा में जाना है।
क्योंकि चौराहें पे खड़ा हूँ
पर रास्तें का पता नही है।।
आनादिकाल से ये मानव
भटकता ही आया है।
न रास्ता उसे पता है
न मंजिल का ठिकाना है।
अनेक झमेलों में देखो
जिंदगी उलझी पड़ी है।।
जिनका हल ढूढ़ना अब
बहुत ही जरूरी है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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