Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

रास्ता खोजना है

रास्ता खोजना है

संजय जैन

जिंदगी की कहानी अब
किस ओर घूमेंगी।
क्योंकि चौराहें पे आकर
कदम जो रुक गये है।
कहाँ जाना कहाँ से आना
कुछ भी पता नही है।
ऐसा लग रहा है कि
जिंदगी ठहर सी गई है।।


चारों तरफ घोर अंधेरा है
कुछ सूरागों से उजेला है।
इसलिए जिंदगी का इंतिहान
अभी आना बाकी है।
पता नही जिंदगी को
किस दिशा में जाना है।
क्योंकि चौराहें पे खड़ा हूँ
पर रास्तें का पता नही है।।


आनादिकाल से ये मानव
भटकता ही आया है।
न रास्ता उसे पता है
न मंजिल का ठिकाना है।
अनेक झमेलों में देखो
जिंदगी उलझी पड़ी है।।
जिनका हल ढूढ़ना अब
बहुत ही जरूरी है।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ