सावन महोत्सव महिलाओं के लिए अद्भुत अवसर, वृक्षारोपण से बनेगा हरित और समृद्ध भारत : माया श्रीवास्तव.jpeg)
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- समर्थ नारी समर्थ भारत ने सावन माह को बनाया वृक्षारोपण माह, बेंगलुरु के शहजापुर स्थित वंडर वर्ल्ड सोसायटी पार्क में हुआ अभियान का शुभारंभ
बेंगलुरु। भारतीय संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के संरक्षण का संदेश देते हुए ‘समर्थ नारी समर्थ भारत’ संगठन द्वारा सावन माह को वृक्षारोपण माह के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इसी अभियान की शुरुआत बेंगलुरु के शहजापुर स्थित वंडर वर्ल्ड सोसायटी के पार्क परिसर में स्थित शिव मंदिर के प्रांगण से की गई। इस अवसर पर महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुधा शुक्ला ने की, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन विद्या देवी ने किया। कार्यक्रम के अंत में विमला लाल ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं महिलाओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर समर्थ नारी समर्थ भारत की राष्ट्रीय सह-संयोजिका माया श्रीवास्तव ने कहा कि सावन का महीना भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह महीना उमंग, उत्साह, भक्ति और हरियाली का संदेश लेकर आता है। सावन आते ही प्रकृति का स्वरूप बदल जाता है और चारों ओर हरियाली दिखाई देने लगती है। प्रकृति की यह हरियाली न केवल वातावरण को सुंदर बनाती है, बल्कि मनुष्य के मन को भी प्रसन्नता और शांति से भर देती है।

माया श्रीवास्तव ने कहा कि सावन किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण महीना है। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ किसान खेतों में विभिन्न प्रकार के अनाज, सब्जियों और फूलों की बुआई करते हैं। बारिश से धरती में नई ऊर्जा का संचार होता है और प्रकृति नए पौधों एवं वनस्पतियों को जन्म देती है। यही कारण है कि सावन को प्रकृति के नवजीवन का महीना भी कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में सावन का संबंध प्रकृति और पर्यावरण से सदियों पुराना रहा है। पुराणों और धार्मिक मान्यताओं में भी सावन माह का विशेष उल्लेख मिलता है। समुद्र मंथन की कथा से लेकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना तक सावन का धार्मिक महत्व व्यापक है। वहीं, प्रकृति के दृष्टिकोण से भी यह महीना धरती पर हरियाली और जीवन के विस्तार का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि सावन का महीना मनुष्य, पशु-पक्षी और समस्त जीव-जगत के लिए खुशहाली लेकर आता है। वर्षा के कारण जलस्रोतों में पानी का स्तर बढ़ता है, पेड़-पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है और वातावरण में हरियाली फैलती है। ऐसे में सावन के दौरान अधिक से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
माया श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। बढ़ते तापमान, घटते वन क्षेत्र और प्रदूषण के कारण पर्यावरण का संतुलन प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह प्रकृति की रक्षा के लिए आगे आए। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से आह्वान किया कि वे सावन के पूरे महीने को वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण अभियान के रूप में मनाएं।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाए, तो आने वाले वर्षों में देश को हराभरा बनाने में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। केवल पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने घर, सोसायटी, पार्क, मंदिर परिसर, विद्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर पौधारोपण करें तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा, “वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। पेड़ हमें शुद्ध वायु, छाया, फल और पर्यावरणीय संतुलन प्रदान करते हैं। यदि हम आज अधिक से अधिक वृक्ष लगाएंगे और उनकी रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण दे पाएंगे। वृक्ष लगाना केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का भी एक महत्वपूर्ण कार्य है।”
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं ने पौधारोपण अभियान को पूरे सावन माह तक जारी रखने और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का संकल्प लिया। महिलाओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है और वृक्षों को भी देवतुल्य सम्मान दिया गया है। इसलिए धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
कार्यक्रम में मिथिलांचल की सांस्कृतिक परंपराओं का भी उल्लेख किया गया। माया श्रीवास्तव ने कहा कि सावन माह महिलाओं के लिए विशेष उत्साह और उल्लास का समय होता है। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं से जुड़े पारंपरिक पर्व एवं उत्सव आयोजित किए जाते हैं। मिथिलांचल में मधुश्रावणी जैसे महत्वपूर्ण पारंपरिक पर्व की शुरुआत भी सावन की अवधि में होती है, जो महिलाओं की आस्था, संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने सभी महिलाओं को सावन महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सावन का यह पवित्र महीना भक्ति, प्रेम, सौहार्द, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर आए। उन्होंने संगठन की महिलाओं से अपील की कि वे इस अभियान को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि इसे जन-अभियान का रूप दें।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति रही। सभी ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस अवसर पर संध्या गुप्ता, ऊषा चौरसिया, निशु राय, रीता झा, मीना खरे, नीलू सिंह भूमिहार, संध्या पांडे, नमिता देवी, रोमिता, पूनम राज, नीता जायसवाल, सुरेखा सरकार, मीना देवी, गीता पांडे, आरती सिंह, सुनीता सिन्हा, सोनी गुमला, संध्या शर्मा, शशि बत्रा, सीमा देवी, रेखा शर्मा, गरिमा शर्मा, माधवी, अंजलि सिंह सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने कहा कि ‘समर्थ नारी, समर्थ भारत’ का यह अभियान सावन माह में महिलाओं की सहभागिता से पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल है।
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